बार्डरों पर फिर बढ़ रही है किसानों की तादाद

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14 नवंबर। किसान आंदोलन की पहली वर्षगांठ करीब आने के साथ, विभिन्न मोर्चों पर सैकड़ों किसान पहुंच रहे हैं। उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड और अन्य राज्यों से भी किसान मोर्चा स्थलों पर लगातार पहुंच रहे हैं।

आज 15 नवंबर को आदिवासी नायक और स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की जयंती है। बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश राज के खिलाफ आदिवासी विद्रोह का नेतृत्व किया था। ऐसे समय में जब भारत सरकार वन संरक्षण अधिनियम,1980 में संशोधन पर विचार कर रही है, जो आदिवासियों के अधिकारों और उनकी आजीविका के लिए हानिकारक होगा, संयुक्त किसान मोर्चा ने बिरसा मुंडा को भावभीनी श्रद्धाजंलि अर्पित करते हुए कहा है कि हम उनके प्रेरणादायी संघर्षपूर्ण जीवन से ऊर्जा प्राप्त कर लगातार मजबूत होते हुए आगे बढ़ रहे हैं।

एक और किसान शहीद

हरियाणा के कैथल जिले के किसान मेवा सिंह पुनिया रविवार को सिंघू बॉर्डर पर शहीद हो गये। इस आंदोलन में अब तक लगभग 665 किसान शहीद हो चुके हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा है कि मोदी सरकार आंदोलन में बलिदान होनेवाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ते जाने के बावजूद आंदोलन के प्रति निर्मम,उदासीन और लापरवाह बनी हुई है।

लखनऊ महापंचायत की तैयारी

22 नवंबर को लखनऊ में आयोजित की जानेवाली किसान महापंचायत की तैयारियां जोरों से चल रही हैं। इससे पहले उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर में 5 सितंबर को किसान महापंचायत हुई थी जिसमें अपार भीड़ उमड़ी थी। फिर सीतापुर में भी एक बड़ी रैली हो चुकी है। लखनऊ में महापंचायत का एलान पहले भी हुआ था लेकिन भारी बारिश को देखते हुए उसे टाल दिया गया था। अब 22 नवंबर को होने जा रही किसान मजदूर महापंचायत के लिए उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में ग्राम स्तरीय लामबंदी बैठकें हो रही हैं।

25 नवंबर को हरियाणा के अंबाला की मोहरा मंडी से शहीद किसान सम्मान पदयात्रा शुरू करने की भी योजना है। यात्रा 5 दिसंबर को टिकरी बॉर्डर पर समाप्त होगी।

लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड की जांच में जहां एक ओर लीपापोती की जा रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य के एक सेवानिवृत्त जज के नेतृत्व में जांच के बारे में यूपी सरकार से जवाब के लिए सुप्रीम कोर्ट आज मामले की सुनवाई करेगा।

लखीमपुर न्याय महापंचायत

पीलीभीत जिले के पूरनपुर में आज ‘लखीमपुर न्याय महापंचायत’ में किसानों ने भारी संख्या में भागीदारी की। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि लखीमपुर खीरी किसान नरसंहार में न्याय के लिए संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक कि अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त और गिरफ्तार नहीं किया जाता और सभी दोषियों को निर्दोष किसानों पर जानलेवा हमले के लिए सजा नहीं सुनाई जाती। सभा ने अब तक गिरफ्तार किए गए 4 किसानों को रिहा करने की भी मांग की। सभी घायलों के मुआवजे का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया गया। इस बीच, शहीद किसान अस्थि कलश यात्रा रविवार को महाराष्ट्र के जीवननगर से होकर निकली।

खेती और खाद्य व्यवस्था के निगमीकरण के खिलाफ आम किसानों का संघर्ष लगातार विस्तृत होता जा रहा है। राजस्थान के हनुमानगढ़ में सरकारी गोदाम को एक निजी संस्था को सौंपे जाने के खिलाफ पिछले 25 दिनों से धरना चल रहा है।

संयुक्त किसान मोर्चा ने हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला द्वारा विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करनेवाले किसान संगठनों के गलत इरादों को जिम्मेदार ठहराने वाले बयानों की निंदा की है। उनका यह कहना गलत है कि हरियाणा सरकार द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति मोदी सरकार के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के बारे में थी। एसकेएम ने डिप्टी सीएम को अपमानजनक और झूठी टिप्पणी करने से बचने की सलाह दी है।

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