मौलाना आजाद के योगदान पर वेबिनार

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14 नवंबर। रविवार को सोसाइटी फॉर कम्युनल हार्मोनी ने ‘राष्ट्रीय आंदोलन तथा राष्ट्र निर्माण में मौलाना अबुल कलाम आजाद की भूमिका’ विषय पर एक राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्र सेवा दल के पूर्व अध्यक्ष डॉ सुरेश खैरनार ने की। राष्ट्रीय महिला आयोग एवं योजना आयोग की पूर्व सदस्य और मौलाना अबुल कलाम आजाद से सम्बन्धित चार पुस्तकों की लेखिका सैयदा हमीद तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेज के इतिहास के प्राध्यापक डॉ अजीत झा वेबिनार में मुख्य वक्ता थे।

वेबिनार में सोसाइटी के सदस्यों के अलावा कई नागरिक संगठनों के प्रतिनिधियों तथा देश में सांप्रदायिक एकता और सद्भाव के लिए कार्य करनेवाले सरोकारी नागरिकों ने हिस्सा लिया। वेबिनार का संचालन सोसाइटी के अध्यक्ष तथा प्रसिद्ध समाजशास्त्री प्रो आनंद कुमार ने किया। प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रवादी नेता तथा स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षामंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की राष्ट्रीय आंदोलन तथा राष्ट्र निर्माण में भूमिका पर रोशनी डालते हुए सैयदा हमीद ने कई भाषाओं में उनकी विद्वत्ता का उल्लेख किया और उनके कई भाषणों का उद्धरण देकर उन्हें भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का महान राष्ट्रवादी नेता बताया जो पहली बार ब्रिटिश काल में 1921 में गिरफ्तार किये गये थे और फिर कई बार आजादी की लडाई में जेल गये। नागरिक अधिकार आंदोलनों की नेता सैयदा हमीद ने आगे यह भी बताया कि मौलाना आजाद अंत तक भारत विभाजन का विरोध करते रहे और उन्होंने यहाँ तक भी कह डाला था कि पाकिस्तान अगर बन भी जाएगा तो सफल नहीं होगा।

सामाजिक आंदोलनों से जुड़े समाजवादी डॉ अजीत झा ने अपने वक्तव्य में कहा कि मौलाना आजाद मात्र 35 वर्ष की आयु में 1923 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बन गये थे और 1940 से लेकर 1946 तक कांग्रेस के 6 साल तक अध्यक्ष रहे। उन्होंने आगे यह भी बताया कि मौलाना आजाद धर्म को राष्ट्र निर्माण आधार नहीं मानते थे यद्यपि भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यक के लिए चिंता को स्वाभाविक मानते थे। डॉ झा ने यह भी कहा कि भारत विभाजन में अंग्रेजों की सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका थी।

चर्चा में प्रसिद्ध समाजवादी नेता थप्पन थामस, सद्भाव मिशन के प्रो विपिन कुमार त्रिपाठी, भुवनेश्वर से सिप्रा सागरिका, यू एस से सतीनाथ चौधरी, जेपी फाउंडेशन के अध्यक्ष तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के समाजवादी शिक्षक मंच के नेता शशि शेखर सिंह आदि ने हिस्सा लिया।

वेबिनार के अध्यक्ष डॉ सुरेश खैरनार ने मौलाना आजाद का स्मरण करते हुए देश में आज के साम्प्रदायिक माहौल पर गंभीर चिंता व्यक्त की और मुस्लिम अल्पसंख्यक के ऊपर कट्टरपंथी हिंदूवादी संगठनों के लगातार बढ़ते हमले के विरुद्ध सभी को संगठित होकर गांधी के द्वारा बताये अहिंसक तरीके से लड़ने पर जोर दिया। वेबिनार के अंत में समाजवादी समागम के डॉ अनिल ठाकुर ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

– शशि शेखर सिंह

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