रामनवमी पर हिंसा व घृणा का प्रदर्शन भगवान राम का अपमान – स्वराज इंडिया

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स्वराज इंडिया ने देश भर में हो रही सांप्रदायिक घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। जानकारी के अनुसार रामनवमी के दिन देश के कई हिस्सों में उग्र जुलूस निकाले गए। बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल में हिंसक झड़पें हुईं और इन घटनाओं में दो लोगों के मारे जाने की खबर है। बिहार में उग्र भीड़ एक मस्जिद के ऊपर चढ़ गयी और भगवा झंडा लगा दिया। मध्य प्रदेश में एक मस्जिद के सामने उग्र भीड़ को तलवार लहराते देखा गया। इस बीच, मध्य प्रदेश सरकार ने बिना किसी मुकदमे के मुसलमानों को गिरफ्तार करके और उनके घरों को तोड़कर, उन्हें सजा दे दी। यहां तक कि जेएनयू में भी छात्रों पर उनकी पसंद के खाने को लेकर हमला किया गया।

रामनवमी का त्योहार भगवान राम के जन्म पर मनाया जाता है, जिन्हें धर्म और कर्तव्य, दया और निष्पक्षता के लिए पूजा जाता है। रामनवमी के दिन ऐसी हिंसा और घृणा का प्रदर्शन भगवान राम, जिन्हें अल्लामा इकबाल ने इमाम-ए-हिंद कहा था, का अपमान और तिरस्कार है।

रामनवमी की घटना सांप्रदायिक घटना का इकलौता मामला नहीं है, बल्कि भाजपा की नफरत की परियोजना का एक हिस्सा है। 2 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में स्वघोषित महंत बजरंग मुनि ने पुलिस की मौजूदगी में मुस्लिम महिलाओं के बलात्कार का आह्वान किया। 3 अप्रैल को बुराड़ी, दिल्ली में एक धर्म संसद में, यति नरसिंहानंद ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ हथियार उठाने का आह्वान किया। चार महीने भी नहीं हुआ, जब हरिद्वार में एक अन्य धर्म संसद में, यति नरसिंहानंद और अन्य चरमपंथी हिंदुत्व और भाजपा नेताओं द्वारा नरसंहार और गृहयुद्घ का आह्वान किया गया था। इस बीच, भाजपा शासित राज्यों में, भाजपा नेता अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने और सांप्रदायिक तनाव फैलाने के लिए हिजाब, मुस्लिम व्यवसायों पर प्रतिबंध, मांस पर प्रतिबंध, और अन्य मुद्दे उठाते रहे हैं।

स्वराज इंडिया के ताजा बयान में कहा गया है कि यह सत्तारूढ़ दल द्वारा भारत और उसके संविधान पर सीधा हमला है, और भारत के सभी नागरिकों को इसके विरुद्ध संघर्ष करना चाहिए। स्वराज इंडिया देश के लोगों से भाजपा के नफरत के शासन के खिलाफ मजबूती से खड़े होने और सांप्रदायिकता और नफरत की ताकतों से भारत की रक्षा करने का आह्वान करता है। हम राज्य सरकारों से मांग करते हैं कि नफरत और हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ तत्काल और निष्पक्ष कार्रवाई करें। हम न्यायपालिका से राज्य सरकारों द्वारा पक्षपातपूर्ण कार्रवाई के मामलों में लोगों के अधिकारों की रक्षा करने का भी आह्वान करते हैं।

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