— विज्ञान मोदी —
हिंदुस्तान के समाजवादी आंदोलन के प्रमुख नेता और डॉ. राममनोहर लोहिया के अनुयायी श्री रबि राय से मेरी पहली मुलाकात 22 दिसम्बर, 1969 को दिल्ली में समाजवादी युवजन सभा के दौरान हुई। उस दिन पाँच सूत्रीय मांगों को लेकर संसद भवन के सामने ऐतिहासिक प्रदर्शन चल रहा था। इस प्रदर्शन में पूरे देश के लगभग सभी राज्यों से आए दस हजार से अधिक युवक-युवतियों ने भाग लिया था। युवजनों का सैलाब मिंटो ब्रिज से गगनभेदी नारों के साथ देश की संसद की ओर बढ़ रहा था। पटेल चौक से आगे पार्लियामेंट स्ट्रीट पर पुलिस की भारी नाकाबंदी थी। इर्द-गिर्द के सारे रास्ते सशस्त्र पुलिस बल से अटे पड़े थे।
प्रदर्शन का नेतृत्व समाजवादी युवजन सभा के तत्कालीन अध्यक्ष किशन पटनायक व सयुस के प्रधानमंत्री सत्यदेव त्रिपाठी कर रहे थे। प्रदर्शन में सर्वश्री राजनारायण, मधु लिमये, रबि रॉय, जनेश्वर मिश्र, जे.एच. पटेल, अर्जुनसिंह भदौरिया, रामसेवक यादव, गोलाप बोरबोरा, मनीराम बागड़ी आदि नेता शामिल थे। पुलिस के अश्रुगैस और बर्बर लाठी चार्ज से बीसियों युवजन घायल हुए। संसद परिसर की ओर बढ़ते सर्वश्री राजनारायण, मधु लिमये, रबि रॉय, जनेश्वर मिश्र, जे.एच. पटेल, मनीराम बागड़ी, अर्जुनसिंह भदौरिया, रामशरणदास, किशन पटनायक, प्रोफेसर विनयकुमार व मेरे सहित कुल 252 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया और जमानत देने से इनकार करने पर तिहाड़ जेल भेज दिया गया।
जनवरी, 1969 में जोधपुर से मैंने अपने साथी गौतम भंडारी के साथ समाजवादी युवा आंदोलन की मुखपत्रिका के तौर पर “युवजन” पत्रिका का प्रकाशन प्रारंभ किया। इस पत्रिका में वैचारिक आलेखों, देशव्यापी संगठनात्मक व आंदोलनात्मक गतिविधियों के प्रकाशन व प्रसारण में सर्वश्री राजनारायण, मधु लिमये व रबि रॉय का विशेष परामर्श तथा योगदान मिलता रहा।
श्री रबि रॉय से मिलने का अवसर मेरे अग्रज श्री सुज्ञान मोदी भाईसाहब के साथ कई बार मिला। उनका दफ्तर थापर हाउस जनपथ पर था और बगल में ही संसद सदस्यों का आवास वेस्टर्न कोर्ट था। श्री सुज्ञान मोदी स्वयं गांधीजी और डॉ. लोहिया के जीवन और विचारों से प्रभावित रहे हैं। अतः श्री रबि राय से पार्टी के आंदोलन और कार्यक्रम के बारे में चर्चा होती रहती थी।
सन् 1971-73 में समाजवादी युवजन सभा का केंद्रीय मंत्री होने के नाते दो वर्षों तक साउथ ब्लॉक दिल्ली में मेरे प्रवास के दरमियान अक्सर श्री रबि राय से मार्गदर्शन मिलता रहा। जुलाई 1979 में जनता पार्टी के विभाजन पर श्री रबि राय सहित अनेक सांसदों के साथ श्री राजनारायण जी के नेतृत्व में “जनता पार्टी (सेक्युलर)” का गठन हुआ और राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मुझे दी गई, उस दौरान भी श्री रबि राय से मेरा संपर्क बना रहा। सन् 1989 – 1991 के मध्य जब श्री रबि राय लोकसभा अध्यक्ष थे, तब लोकसभा में एक से अधिक बार उनके चेंबर में सहजता के साथ जो मुलाकात होती थी, उनकी सरलता और स्नेह अविस्मरणीय है।
श्री रबि राय का संपूर्ण जीवन सादगीपूर्ण, अहंकाररहित, मिलनसार और जीवट व्यक्तित्व का प्रतीक रहा है। समाजवादी आंदोलन के कर्णधारों और पार्टी के साधारण से साधारण कार्यकर्ताओं के लिए भी वे सदैव उपलब्ध रहे। उनके जन्मशताब्दी वर्ष में हो रहे इस आयोजन पर मैं अत्यंत कृतज्ञ हृदय से उनका स्मरण करता हूँ और उनकी प्रेमिल स्मृतियों को हृदय से प्रणाम करता हूँ।
















