६ जुलाई १९४४ को आज़ाद हिन्द फ़ौज रेडियो से सुभाषचन्द्र बोस ने महात्माजी के नाम एक पत्र प्रसारित किया था।
कुछ अंश—
महात्माजी,
भारत और भारत के बाहर अनेक भारतीय हैं, जो मानते हैं कि संघर्ष के ऐतिहासिक तरीकों से ही आज़ादी प्राप्त की जा सकती है।
भारत के बाहर रहने वाले भारतीयों की दृष्टि में आप हमारे देश की वर्तमान जागृति के जनक हैं। पिछली शताब्दी में किसी भी अन्य नेता को ऐसा सम्मान नहीं मिला।
यदि मित्र राष्ट्र किसी तरह जीत भी गए, तो भविष्य में ब्रिटेन नहीं, बल्कि अमेरिका शीर्ष पर होगा और ब्रिटेन अमेरिका का आश्रित बन जाएगा। मुझे अपने गोपनीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि भारत के राष्ट्रवादी आंदोलन को कुचलने की पूरी तैयारी की जा रही है। युद्ध ने ब्रिटिश साम्राज्य के विरोधियों से राजनीतिक और सैन्य सहायता मिलने की संभावनाओं को बढ़ा दिया है।
भारत की आज़ादी की माँग के प्रति उनका दृष्टिकोण क्या है—यह जानने के लिए मैंने भारत छोड़ना आवश्यक समझा। मैंने पाया है कि ब्रिटिश प्रचार के बावजूद धुरी राष्ट्र भारत की आज़ादी के समर्थक हैं। मैंने ऐसा कुछ नहीं किया जिससे भारत के सम्मान और देशवासियों के हितों पर कोई आँच आए।
भारत की आज़ादी का आख़िरी युद्ध शुरू हो चुका है। आज़ाद हिन्द फ़ौज के सैनिक भारत की भूमि पर बहादुरी से लड़ रहे हैं और दृढ़ता के साथ धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं।
हमारे राष्ट्रपिता, भारत की आज़ादी की इस पवित्र लड़ाई में हम आपके आशीर्वाद की कामना करते हैं।
जय हिन्द
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