— उदय प्रताप सिंह —
नेताजी स्वतंत्रता सेनानी थे, लेकिन हजारों स्वतंत्रता सेनानियों में वह एकमात्र ऐसे आजादी के पुरोधा थे, जो हर देशभक्त हिंदुस्तानी के हृदय में आज भी बसे हुए हैं। पूरा देश आज उनको और उनके कार्यों को, सादर नमन करता है, और उन्हें श्रद्धांजलि देता है।आजादी की लड़ाई में बहुत से लोग अपने-अपने ढंग से काम कर रहे थे उनके विचारों में अंतर हो सकता है, लेकिन अंग्रेजों की गुलामी से देश को आजादी मिले, इस पर सब एक मत थे।
गांधी जी अहिंसा में विश्वास करते थे और कहते थे की हिंसा से मिली आजादी उन्हें स्वीकार नहीं है। लेकिन भगत सिंह और नेताजी जैसे कई सेनानियों की धारणा थी की आजादी जैसे मिले जिस साधन से मिले वह हमको स्वीकार करना चाहिए ।
गांधी जी, भगत सिंह और नेताजी में विचारों का मतभेद भले हो लेकिन वह एक दूसरे को बहुत प्यार, आदर-सत्कार करते थे। क्योंकि उनका लक्ष्य एक था, देश सब धर्म से बड़ा है। नेताजी ने देश को आजाद करने में बड़ी भूमिका निभाई है। सन 1930 में लाहौर कांग्रेस के अधिवेशन में 26 जनवरी को पूर्ण आजादी का संकल्प की प्रमुख भूमिका में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का योगदान था
” तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा” यह उनका नारा था
” दिल्ली चलो”भी उनका नारा था और “जय हिंद” भी उनका ही नारा है।
वह हिंदू और मुसलमान में अंतर नहीं करते थे वे देश को धर्म से बड़ा मानते थे वे देश की एकता और अखंडता में विश्वास करते थे, इसीलिए आजाद हिंद सेना में सभी धर्मों के लोग बड़े पदों पर काम करते थे । गांधी जी और भगत सिंह की तरह नेताजी भी अपने विचारों में एक समाजवादी थे ऐसा उन्होंने भी माना और उनके परिवार के लोग भी मानते हैं।
शायद नई पीढ़ी को यह बात नहीं मालूम होगी की कैसे नेताजी ने ब्रिटिश सरकार को चकमा देकर हिंदुस्तान छोड़कर विदेश चले गए थे।
जब ब्रिटिश सरकार ने उनके ऊपर पहरा बैठा रखा था और उन्हें अपने घर से बाहर निकालने की अनुमति नहीं थी, तो उन्होंने बड़ी कुशलता से अपने अनशन पर जाने का एक बहाना करके,सैकड़ो पुलिस कर्मी और दर्जनों गुप्त चारों को धोखा देकर एक मुसलमान का भेष रखकर अपने भाई शिविर बोस की सहायता से , देश के बाहर चले गए और दुनिया के सब बड़े तत्कालीन देश प्रमुखों से बातचीत करके अंग्रेजों के खिलाफ एक वातावरण तैयार किया,और आजाद हिंद सेना का गठन किया था। आजाद हिंद सेवा के कैप्टन अब्बास अली से जो समाजवादी थे, मेरी कई बार मुलाकात हुई और जो किस्से कहानी उन्होंने सुनाएं, उन्हें सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते थे।
यह सब ब्रिटिश सरकार के लिए बहुत बड़ा झटका था आजाद हिंद सेना ने अंडमान निकोबार के एक टापू पर कब्जा भी कर लिया था। नेताजी के कार्यकलापों से साम्राज्यवादियों की आत्मा आतंकित थी, ब्रिटिश सरकार हिल गई थी। और हो सकता है कि इस कारण ब्रिटिश सरकार ने सोचा कि हिंदुस्तान को अब आजादी देनी ही पड़ेगी।
नेताजी को कोटि-कोटि नमन और हृदय से सादर श्रद्धांजलि।
जय हिंद

















