महात्मा गांधी और सरोजिनी नायडू: ‘बापू’ और ‘भारत कोकिला’ की अमर गाथा

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Mahatma Gandhi and Sarojini Naidu

रोजिनी नायडू, जिन्हें ‘भारत कोकिला’ (The Nightingale of India) के नाम से जाना जाता है, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक प्रखर सेनानी, प्रख्यात कवयित्री और कुशल राजनीतिज्ञ थीं। उनका जन्म 13 फरवरी, 1879 को हैदराबाद में हुआ। उनके पिता अघोरनाथ चट्टोपाध्याय एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक और शिक्षाविद् थे, और माता वरदा सुंदरी एक कवयित्री थीं। उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की और बाद में उच्च शिक्षा के लिए लंदन के किंग्स कॉलेज और कैम्ब्रिज के गिरटन कॉलेज गईं।

श्रीमती नायडू 1905 में बंगाल विभाजन के दौरान भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय हुईं।​1914 में लंदन में उनकी मुलाकात गांधीजी से हुई, जिससे उनके जीवन की दिशा बदल गई और उन्होंने खुद को देश सेवा में समर्पित कर दिया। 1925 के कानपुर अधिवेशन में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष बनीं। उन्होंने ‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’ और ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कई बार जेल भी गईं। 1930 के ‘धरसाना सत्याग्रह’ का नेतृत्व उनके साहसी व्यक्तित्व की मिसाल है।

​ऐतिहासिक मुलाकात: सादगी का जादू –

​इस कहानी की शुरुआत 1914 में लंदन के एक साधारण से कमरे में हुई। सरोजिनी नायडू, जो उस समय तक एक प्रसिद्ध कवयित्री बन चुकी थीं, गांधीजी से मिलने पहुँचीं। उन्होंने देखा कि एक दुबला-पतला व्यक्ति फर्श पर बैठकर एक लकड़ी के कटोरे में खाना खा रहा है।

सरोजिनी ​नायडू ने बाद में अपनी यादों में लिखा था कि उस समय उन्हें यह देखकर अचंभा हुआ कि जिसे पूरी दुनिया जानती है, वह इतना सादा कैसे हो सकता है। गांधीजी ने मुस्कुराते हुए उन्हें ऊपर देखा और कहा, “आओ, क्या तुम भी मेरे साथ इस ‘जेल के खाने’ का आनंद लोगी?” उसी क्षण सरोजिनी नायडू गांधीजी की सादगी की मुरीद हो गईं और अपना पूरा जीवन देश सेवा के नाम कर दिया।

​’भारत कोकिला’ और ‘मिकी माउस’: हंसी-ठिठोली का रिश्ता-

​गांधीजी और सरोजिनी नायडू के बीच का हास्यबोध (Sense of Humor) गजब का था। आज के समय में जब राजनीति इतनी गंभीर और तनावपूर्ण हो गई है, तब इन दोनों का रिश्ता हमें सिखाता है कि बड़े उद्देश्यों के बीच भी मुस्कुराना कितना जरूरी है।
​उपनामों का खेल: गांधीजी ने सरोजिनी नायडू की जादुई आवाज और उनकी लेखनी के कारण उन्हें ‘Nightingale of India’ (भारत कोकिला) की उपाधि दी। वहीं, सरोजिनी नायडू भी पीछे नहीं थीं। वे गांधीजी को प्यार से ‘Mickey Mouse’ (उनके बड़े कानों की वजह से) और ‘Little Man’ बुलाती थीं।

​प्रसिद्ध कटाक्ष- सरोजिनी नायडू का वह जुमला आज भी इतिहास में दर्ज है जब उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा था— “बापू को गरीबी में रखने के लिए इस देश को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है!” (क्योंकि गांधीजी जहाँ भी ठहरते थे, उनकी सुरक्षा और बकरी के दूध आदि के इंतजाम में काफी व्यवस्था करनी पड़ती थी)। गांधीजी भी उनकी इन बातों का बुरा मानने के बजाय जमकर ठहाका लगाते थे।

​’नमक सत्याग्रह’ और नारी शक्ति का उदय-

​1930 का दांडी मार्च भारतीय इतिहास का टर्निंग पॉइंट था। जब गांधीजी को गिरफ्तार कर लिया गया, तो ब्रिटिश हुकूमत को लगा कि आंदोलन थम जाएगा। लेकिन वे सरोजिनी नायडू की शक्ति को भूल गए थे।

​धरसाना सत्याग्रह के दौरान सरोजिनी नायडू ने हजारों सत्याग्रहियों का नेतृत्व किया। पुलिस की लाठियां बरस रही थीं, लेकिन नायडू जी हिमालय की तरह अडिग खड़ी रहीं। उन्होंने गांधीजी के ‘अहिंसा’ के मंत्र को जमीन पर उतार कर दिखाया। गांधीजी ने जेल से ही उनकी सराहना की और यह संदेश दिया कि नायडू जी के रूप में भारत को अपनी सबसे मजबूत सेनापति मिल गई है।

गोलमेज सम्मेलन (1931)-
​लंदन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में सरोजिनी नायडू गांधीजी के साथ साये की तरह रहीं। जहाँ गांधीजी अपनी लंगोटी और सादगी से ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दे रहे थे, वहीं सरोजिनी नायडू अपनी विद्वत्ता और ओजस्वी भाषणों से पश्चिमी दुनिया को प्रभावित कर रही थीं। उन्होंने दुनिया को बताया कि भारतीय महिलाएं केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे राष्ट्र निर्माण की मुख्य धारा में हैं।

​जब ‘बापू’ चले गए…

​30 जनवरी 1948 का दिन सरोजिनी नायडू के लिए किसी वज्रपात से कम नहीं था। अपने गुरु और मार्गदर्शक को खोने के बाद वे बुरी तरह टूट गई थीं। ​रेडियो पर दिए गए उनके अंतिम संदेश में उन्होंने कहा था— “मेरे गुरु की मृत्यु नहीं हुई है, वे तो अमर हो गए हैं। उनकी अहिंसा की मशाल अब हमारे हाथों में है।”

महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ-

​प्रथम महिला राज्यपाल- स्वतंत्रता के बाद, वे उत्तर प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल नियुक्त हुईं। वे इस पद पर रहने वाली देश की पहली महिला थीं।

​महिला अधिकार- उन्होंने भारतीय महिलाओं को मताधिकार दिलाने और उनकी शिक्षा के लिए ‘भारतीय महिला संघ’ (WIA) के माध्यम से कड़ा संघर्ष किया।

​निधन- ​2 मार्च, 1949 को कार्यालय में काम करते समय दिल का दौरा पड़ने से लखनऊ में उनका निधन हो गया। भारत में उनके जन्मदिन (13 फरवरी) को ‘राष्ट्रीय महिला दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

महान स्वतंत्रता सेनानी और भारत कोकिला सरोजिनी नायडू को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!


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