मधु जी को याद करते हुए – हरीश खन्ना

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Madhu Limaye

ज महान समाजवादी चिंतक , चार बार लोक सभा के सांसद रहे मधु लिमये जी का जन्म दिन है । उनके साथ मेरी कई यादें जुड़ी हुई हैं। एक एक बार मैं मधु जी के यहां शाम को गया, यह घटना लगभग 80 और 90 के दशक के बीच की है , 40-50 साल पुरानी । मधु जी वेस्टर्न कोर्ट के एक कमरे में रहा करते थे । मधु जी और चंपा जी कहीं बाहर निकल रहे थे तो मुझे देखते ही बोले चलो तुम भी साथ चलो !

मैंने कहा कि नहीं कोई बात नहीं मैं फिर आऊंगा आप कहीं जा रहे हैं तो चले जाइए । चलो एक शादी में जा रहे हैं ! तुम भी चलो!
मैं मुस्कुराने लगा और जाने में हिचक रहा था ।
मुझे संकोच में देखकर बोले _
एक मैरिज रिसेप्शन है । अपने ही लोग हैं। संकोच नहीं करो ।

उनके साथ मैं भी चला गया ।बाहर जाकर एक टैक्सी में बैठकर हम तीनों गए । वहीं संसद भवन के आसपास किसी बंगले में रिसेप्शन था । टैक्सी में जब बैठा तो पता चला कि तारकेश्वरी सिन्हा जी के बेटे अथवा बेटी में से किसी का रिसेप्शन था । जब हम पहुंचे तो बहुत सारे लोग आए हुए थे । तारकेश्वरी जी को सूचना मिली तो मधु जी और चंपा जी को वहां गेट पर लेने वह वहां आईं । उन्होंने हम लोगों को रिसीव किया । शायद तारकेश्वरी जी के मन में उस वक्त मेरे बारे में यह था कि शायद यह इनका बेटा होगा । मधु जी के बेटे अनिरुद्ध लिमये और मैं लगभग हमउम्र हैं। उन्होंने उसी भाव से मेरे बारे में बोला ।

मधु जी ने जब परिचय करवाया तो मेरे बारे में बताया कि यह हरीश है , इसे मेरा बेटा ही समझो ,परिवार का ही है। तारकेश्वरी जी भी उसी आदर भाव से मुझ से मुस्कराते हुई मिलीं । तारकेश्वरी सिन्हा जी कांग्रेस पार्टी से चार बार लोकसभा की सदस्य रहीं। एक ऐसी विदुषी महिला थी जो देखने में भी बहुत सुंदर थी और पार्लियामेंट में बोलने में भी तेज़ तर्रार और कुशल वक्ता। मोरारजी देसाई जब वित्त मंत्री थे तो वह उस मंत्रिमंडल में उप-वित्त मंत्री थीं। गजब की बोलने वाली और शेरो शायरी की शौकीन । मधु जी की बहुत प्रशंसक थी । मधु जी भी विरोधी पक्ष के लोगों में बहुत सम्मानित थे । इसलिए व्यक्तिगत रिश्तों में राजनीति को नहीं आने देते थे और उनका बहुत सम्मान करते थे ।

मधु जी ऐसे लोगों में थे जो अपने चाहने वाले ,कार्यकर्ता, साथी , मित्र उनका बहुत सम्मान करते थे । वैसे स्वभाव से बहुत गम्भीर थे और कई बार बोलने में बहुत रूखे हो जाते थे । पर किस को कद्र और सम्मान देना है यह बख़ूबी से जानते थे ।उन्हें किसी बात से जब तकलीफ होती थी तो बहुत ही विचलित होते थे और उस वक्त वह शास्त्रीय संगीत को सुनकर मन बहलाते थे । मेरा यह सौभाग्य था कि मेरे जैसे एक कार्यकर्ता को उन्होंने अपने परिवार का हिस्सा माना ।

जब मैं विश्वविद्यालय में शिक्षक हो गया तो मैने पहला चुनाव 1987 में शिक्षक संघ की कार्यकारिणी का लड़ा ।समाजवादियों का एक छोटा सा ग्रुप ‘समाजवादी शिक्षक मंच ‘ जो किसी भी पार्टी से नहीं जुड़ा था ,पहली बार उस चुनाव को हम लोगों ने जीता । उस वक्त उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था ।जब मैं पंडारा रोड पर उनके घर मिलने गया तो उनका प्यार , खुशी और आदर देखने लायक था । चंपा जी उन दिनों बम्बई से दिल्ली आई हुई थीं ।

आवाज़ लगा कर बोले चंपा देखो हरीश आए हैं। इन्हें मिठाई खिलाओ ।  अपने हाथ से बनी हुई मिठाई और नमकीन भुजिया चंपा जी लेकर बम्बई से आईं थीं। वह मुझे खाने को मिली ।सबसे बड़ी खुशी यह थी उनकी कि जैसे उनका अपना एक साथी कार्यकारिणी का चुनाव नहीं बल्कि किसी बहुत बड़े चुनाव या जंग को जीत कर आया है । यह प्यार केवल मुझे ही नहीं कितने ही अन्य कार्यकर्ताओं को वह देते थे । अपने हाथ से कितनी ही बार उन्होंने मुझे कॉफी बनाकर पिलाई होगी जिसे मैं कभी भूल नहीं सकता ।

उन्होंने कभी मंत्री पद नहीं स्वीकारा । प्रधानमंत्री बनने पर मोरार जी देसाई और चौधरी चरण सिंह ने उनको अपने मंत्रिमंडल मंत्री बनाने की पेशकश की पर उन्होंने विनम्रतापूर्वक मना कर दिया । उनके यहां आने वाले प्रधानमंत्रियों ,मुख्यमंत्रियों ,केंद्रीय मंत्रियों , राज्यपालों और संसद सदस्यों , कलाकारों और पत्रकारों ,की लंबी सूची है जिन्हें मैं अपनी आंखों से उनके यहां आते देखता था ।ये सब उनसे मंत्रणा करने , सलाह लेने और उन्हें आदर देने के लिए आते थे पर इतनी भीड़ में उन्होंने मेरे जैसे साधारण व्यक्तियों को कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि हम कोई मायने नहीं रखते । जीवन भर एक छोटे से घर में फ्लैट में रहते रहे । सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने के बाद पत्र पत्रिकाओं, अखबारों में लेख लिख कर अपनी जीविका चलाते थे। घर में न फ्रिज ,न टी वी, न एयर कंडीशनर ,सिर्फ मिट्टी के बने घड़े का पीने को पानी । उनकी सादगी ही उनकी सबसे बड़ी इज़्ज़त थी , उनका ज्ञान ही उनकी सबसे बड़ी संपत्ति थी । इसी लिए हमारे यहां राजाओं की पूजा नहीं बल्कि फकीरों, संतो और महात्माओं का आदर सम्मान और पूजा होती है ।

कहने के लिए बहुत कुछ है फिर लिखूंगा अभी आज उनके जन्म दिन पर राजनीति के इस फकीर विद्वान संत को मैं अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं।


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