चंद्रशेखर जनशताब्दी समिति तथा भारत यात्रा ट्रस्ट द्वारा ऑनलाइन मीटिंग का आयोजन

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चंद्रशेखर जनशताब्दी समिति तथा भारत यात्रा ट्रस्ट द्वारा 17 May 2026 को एक ऑनलाइन मीटिंग का आयोजन किया गया।
इसमें चंद्रशेखर जनशताब्दी समिति के प्रमुख साथी शामिल हुए। इसमें श्री सुधींद्र भदौरिया, श्री सूर्यकुमार जी, श्री गोपाल ठाकुर जी, प्रोफेसर आनंद कुमार जी, प्रोफेसर राकेश जी के साथ और भी साथी शामिल रहे। सभी साथियों ने चंद्रशेखर जी के संस्मरणों को अपने-अपने तरीके से याद करते हुए 17 अप्रैल 2026 से शुरू हुए जनशताब्दी समारोह के कार्यों पर चर्चा की।

चर्चा की शुरुआत प्रोफेसर आनंद कुमार जी ने चंद्रशेखर जनशताब्दी समिति को बधाई देते हुए उसके शानदार आयोजनों की सराहना के साथ की, जो 17 अप्रैल को चंद्रशेखर जी द्वारा निर्मित भारत यात्रा आश्रम, गुड़गांव में हुए, और उसके बाद 18 अप्रैल 2026 को विश्व युवा केंद्र में साथियों ने पूरे साल की जो योजना बनाई, उसके लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने यह भी बताया कि कार्यक्रम के प्रेस रिलीज और वीडियो प्रचार के माध्यम से लाखों लोगों तक पूरे कार्यक्रम की जानकारी पहुंच रही है। इसके साथ ही उन्होंने भारत यात्रा के संसाधनों को बताते हुए कहा कि जो भी लोग चंद्रशेखर जी द्वारा आयोजित पदयात्रा में शामिल हुए, उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई। उनमें से अनेक लोग आज भी सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जनसेवा का कार्य कर रहे हैं। लाखों लोग उस पदयात्रा में देश की समझ को विकसित करने के लिए जुड़े और आज भी उन यादों को विरासत के रूप में याद करते हैं। उसके बाद भारत यात्रा केंद्र बने, जहां से रचनात्मक कार्यों को करने की शुरुआत हुई।

प्रोफेसर आनंद कुमार जी ने यह भी बताया कि जो पांच प्रश्न चंद्रशेखर जी ने देश निर्माण के लिए लक्षित किए थे, उन पर कार्य करने के लिए साथियों को आगे आना चाहिए और आह्वान भी करना चाहिए।

इसके बाद भारत यात्रा ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री सुधींद्र भदौरिया जी ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जो संकल्प 17 अप्रैल 2026 को लिया गया था कि हम इस एक वर्ष को चंद्रशेखर जी की प्रेरणा से उत्पन्न विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए लगाएंगे, उसे गति देने की जरूरत है। और इसीलिए एक साल में पूरे कार्यक्रम का एक सिलसिला बनेगा। इस सिलसिले में जहां-जहां संभव है, वैचारिक कार्यक्रम किए जाने चाहिए, खासकर जहां भारत यात्रा केंद्र 15 जगहों पर हैं, वहां बड़े कार्यक्रम किए जाएंगे।
चंद्रशेखर जी द्वारा बताए गए पांच सूत्री कार्यक्रमों पर देशभर में चर्चा होनी चाहिए और जहां-जहां भी आयोजन हों, कम से कम वहां इसकी चर्चा जरूर हो। श्री भदौरिया जी ने अनेक पदयात्राओं का भी जिक्र किया, जिससे देश की सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों को नए तरीके से समझने का अवसर मिला। उन्होंने चंबल की यात्रा का विशेष जिक्र किया, जो चंबल से निकलकर कटनी तक गई थी।

बहुत सारे चंद्रशेखर जी के अनुयायियों का यह मानना था कि एक बड़ा कार्यक्रम इटावा शहर में भी होना चाहिए। इसी संदर्भ में 22 May को इटावा में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाना है। 22 May के कार्यक्रम को अनेक साथियों ने आयोजित किया है, जिसमें प्रमुख रूप से खादिम अब्बास हैं, जो स्थानीय अखबार भी निकालते हैं। वह कहते हैं कि जब डॉक्टर लोहिया जी का भाषण हुआ था, तो वह वहां उपस्थित थे।

गणेश ज्ञानभारती, जो पिछड़े और वंचित वर्गों के लिए समर्पित भाव से कार्य करते हैं, वह भी उपस्थित रहेंगे। इसके साथ-साथ सुधीर मिश्रा जी, जिन्होंने अर्जुन सिंह भदौरिया जी पर लिखी गई पुस्तक में काफी मदद की थी, वह भी उपस्थित रहेंगे। इसके साथ ही डॉ. जयचंद सिंह जी, जो पदयात्रा में शामिल रहे, वह भी शामिल होंगे।

इसके साथ ही अनेक भारत यात्री वहां पहुंच रहे हैं। स्वयं श्री सुधींद्र भदौरिया भी वहां पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही कार्यक्रमों के एक लंबे सिलसिले की शुरुआत भी होने वाली है। जिस गांव में यह आयोजन हो रहा है, वहां स्वयं डॉ. राममनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण , अरुणा आसफ अली जैसे समाजवादी नेता आ चुके हैं।

इसके साथ ही एक कार्यक्रम शाम के वक्त शहर में भी आयोजित किया गया है। इस तरह यह पूरे दिन भर का कार्यक्रम होगा। श्री सुधींद्र भदौरिया जी ने ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसमें शामिल होने के लिए आह्वान किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के आयोजन से उन तमाम साथियों, खासकर संघर्ष के साथियों को, एक साथ इकट्ठा होकर उन संस्मरणों और उन सुनहरे पलों को याद करने का अवसर मिलेगा। साथ ही एक नई प्रेरणा और संकल्प के साथ फिर से चंद्रशेखर जी के विचारों पर कार्य करते हुए देश निर्माण का संकल्प दोहराने की जरूरत है।

चंद्रशेखर जी के करीबी रहे श्री सूर्यकुमार जी ने दर्जनों ऐसे कार्यक्रमों के बारे में बताया, जो अगले महीने से शुरू होने वाले हैं। उन्होंने बहराइच में एक बड़े कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी और कहा कि मौसम ठीक होते ही कार्यक्रम की तैयारी शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि चंद्रशेखर जी अपने समय में हर वर्ष बहराइच आया करते थे और वहां दो दिनों का सम्मेलन हुआ करता था, जिसमें हजारों लोग सम्मिलित हुआ करते थे।

उन्होंने यह भी बताया कि बहराइच के रचनात्मक केंद्र में हर वर्ष चंद्रशेखर जी के जन्मदिन और पुण्यतिथि पर कार्यक्रम होता है। उन्होंने उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक और पूर्व से लेकर पश्चिम तक अनेक जगहों का जिक्र किया, जहां से चंद्रशेखर जी पर अनेक कार्यक्रम किए जाने की सूचनाएं प्राप्त हो रही हैं।

इसके साथ ही 17 अप्रैल 2027 को राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा कार्यक्रम किए जाने की भी संकल्पना ली गई। प्रोफेसर राकेश जी, जो बनारस से जुड़े हैं, उन्होंने भी चंद्रशेखर जी के संस्मरणों को याद करते हुए उनके जन्मशताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में कार्यक्रमों में शामिल होने की इच्छा जताई और हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया। इसके साथ ही श्री गोपाल ठाकुर जी ने हैदराबाद में कार्यक्रम करने की इच्छा जाहिर की और जल्द ही इसके बारे में जानकारी देने की बात कही।

महाराष्ट्र से पूतनबार जी, जो भारत यात्रा में शामिल रहे, उन्होंने चंद्रशेखर जी के नाम से एक पुस्तकालय चलाने की बात कही। इसके साथ ही पुणे में होने वाले कार्यक्रमों में शामिल होने की भी जानकारी दी। इसके साथ-साथ उन्होंने दो-चार और कार्यक्रमों की जानकारी दी, जो महाराष्ट्र के अलग-अलग स्थानों पर चंद्रशेखर जनशताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में किए जाने हैं।
इसके साथ ही अन्य साथियों ने भी अपनी बातें साझा कीं और चंद्रशेखर जी के जनशताब्दी समारोह को धूमधाम से मनाने की बात कही। इसके साथ ही साहित्य के प्रकाशन में भी योगदान के लिए लोगों ने अपनी भूमिका तय की। दर्जनों लेख भी आ गए हैं, जिन्हें दूसरी स्मारिका में सम्मिलित करके प्रकाशित किया जाना है।

एक बार फिर श्री सुधींद्र भदौरिया जी ने 22 May 2026 को चंबल में होने वाले चंद्रशेखर जनशताब्दी समारोह के कार्यक्रमों में लोगों से जुड़ने की अपील की और कहा कि इसकी विस्तृत सूचना जल्द ही सार्वजनिक की जाएगी।


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