राजनीति

पेंच बाँध परियोजना में हो रहे भ्रष्टाचार का श्रेय भी कांग्रेस और भाजपा लेंगी...

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— एड. आराधना भार्गव — प्रतिदिन अखबारों में हम पेंच परियोजना की नहरों के भ्रष्टाचार को पढ़ रहे हैं, बाँध और नहर बनाने की होड़ में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी आमने सामने दिखाई दे...

लखीमपुर हत्याकांड उत्तर प्रदेश चुनाव का मुद्दा बनेगा?

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— डॉ सुनीलम — लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड की सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार गठित एसआईटी की रिपोर्ट आ गयी है। इसमें स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि अब तक की विवेचना व संकलित साक्ष्यों...

महात्मा गांधी का आध्यात्मिकतावाद

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— सत्यम् सम्राट आचार्य — इन्दौर विश्वविद्यालय में पिछले तीन अकादमिक वर्षों से राजनीति विज्ञान के विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम का पारायण करवा रहा हूँ। स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों में विवेक का इतना स्तर तो है ही...

किसान आंदोलन का संदेश

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— केशव शरण — जिस दिन संसद में कृषि के तीनों बिल पास हुए थे लोगों को लगने लगा था कि अब देश का आर्थिक और लोकतांत्रिक ढाँचा खतरे में है। नोटबंदी जैसे बड़े और...

क्या भागवत हिंदुओं को (अहिंसक) उग्रवादी बनाना चाहते हैं?

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— श्रवण गर्ग — संघ प्रमुख मोहन भागवत अगर एक लम्बे समय से सिर्फ एक बात दोहरा रहे हैं कि हिंदुओं को ताकतवर बनने (या उन्हें बनाए जाने) की जरूरत है तो इसे एक गम्भीर...

विषमता की बिसात पर वनवासी

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— जयराम शुक्ल — मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री बिसाहूलाल सिंह के एक बयान से क्षत्रिय वर्ग के लोग आगबबूला हैं। इसकी प्रतिक्रिया में क्षत्रियों के एक संगठन ने ऐलान कर दिया कि मंत्री को एक...

आखिर गांधी को निशाना क्यों बनाया जा रहा है !

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— शिवानंद तिवारी — उनकी हत्या तो 73 वर्ष पूर्व हो गयी थी। जीवित गांधी किसी व्यक्ति या विचारधारा के रास्ते में अवरोध थे यह बात तो समझ में आती है लेकिन मृत गांधी पर...

पटाखों से मत लड़ो !

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— प्रेरणा — मैं इस उलझन में हूं कि किसी को यह कैसे समझाऊं कि आपकी समझ कोई 80-90 साल पुरानी है; और इतनी खतरनाक है कि यह हिंदुस्तान के टुकड़े फिर वैसे ही कर...

नेहरू का रचनात्मक राष्ट्रवाद

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— नीरज कुमार — जवाहरलाल नेहरू आधुनिक भारत के एक सुलझे हुए राजमर्मज्ञ थे। नेहरू जी का राजनीति-दर्शन उन जीवंत विचारों में निहित है जो उन्होंने मुख्यतः इतिहास के विवेचन, भारतीय राजनीति के निर्देशन और...

सांप्रदायिक ताकतों की फितरत

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— मुनेश त्यागी — सभी तरह की साम्प्रदायिक ताकतें वैसे तो अपने अपने धर्म की बातें करती हैं। पर असल में ये ताकतें धर्म की कम, अधर्म, अंधविश्वास और धर्मान्धता की बातें ज्यादा करती हैं।...