शर्महीन मर्यादा के युग में – डॉ. योगेन्द्र
कल संसद का सत्र स्थगित हुआ। सभी सांसद अपने-अपने घर वापस लौटे। सरकार को जो मनमानी करनी थी, की, लेकिन पहली बार प्रधानमंत्री को विपक्ष के ज़ोरदार नारे से मुलाक़ात हुई—
“वोट चोर, गद्दी छोड़।”
ग्यारह...
सत्ता की बिल्ली के गले में घंटी बांधने में कामयाब कांग्रेस
— राकेश अचल —
वोट चोरी के मुद्दे पर देश का बिखरा विपक्ष पहली बार इतनी मजबूत से प्रकट हुआ है कि सत्ता के होश फाख्ता हो गए हैं. पिछले 11 साल में विपक्ष वोट...
इन दिनों आओ राजा, हम ढोयेंगे पालकी
— डॉ. योगेन्द्र —
‘आओ राजा, हम ढोयेंगे पालकी।’ नीतीश कुमार, जीतनराम मांझी, चिराग़ पासवान, उपेंद्र कुशवाहा आदि राजा की पालकी ढो रहे हैं। राजा पब्लिक सेक्टर को ख़त्म कर रहा है। सरकारी स्कूल, कॉलेज...
नेहरू के राधाकृष्णन और मोदी के राधाकृष्णन
— राकेश अचल —
भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को पानी पी पीकर भले ही कोसते हों लेकिन संकट की हर घडी में नेहरू ही भाजपा और मोदी...
उपराष्ट्रपति पद के एनडीए उम्मीदवार श्री सी.पी. राधाकृष्णन
— परिचय दास —
।। एक ।।
भारतीय राजनीति में हर संवैधानिक पद की उम्मीदवारी केवल एक औपचारिकता नहीं होती बल्कि गहरे राजनीतिक संकेतों और व्यापक रणनीतिक संदेशों से जुड़ी होती है। जब एनडीए ने श्री
चंद्रपुरम...
कब रुकेगा केंद्र और सर्वोच्च न्यायालय का टकराव
— राकेश अचल —
देश के सर्वोच्च न्यायालय और केंद्र के बीच का टकराव भी अब सनातन हो चला है. ये टकराव कांग्रेस की सरकारों के समय भी था और आज भाजपा की लंगडी सरकार...
सूची नहीं लोकतंत्र का शुद्धीकरण होना चाहिए
— अरुण कुमार त्रिपाठी —
आपातकाल के पचास वर्ष पूरे होने पर एक बार फिर भारतीय लोकतंत्र संदेह के गहरे वातावरण में फंस गया है। अब तक ऐसा लगता था कि भारतीय समाज और लोकतंत्र...
जब लोग मतदान से कन्नी काटने लगेंगे
— राकेश अचल —
भारत में पिछले कुछ दिनों से केंद्रीय चुनाव आयोग अविश्वसनीय हुआ है और जिस तरीके से आयोग ने बिहार में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण अभियान के नाम पर कतर व्योंत...
जगदीप धनकड जन अदालत में हाजिर हों!
— राकेश अचल —
देश के पूर्व उप राष्ट्रपति जगदीप धनकड़ अपने पद से इस्तीफा देने के बाद से लापता हैं. धनखड़ के बारे में कुछ अटकलें और सवाल उठे हैं कि उनके ठिकाने के...
मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा
— राकेश अचल —
साल 1988 में पियूष पांडे द्वारा लिखा गया ये गीत पंद्रह भाषाओं में गाया गया. राग भैरवी का ये गीत आज के राजनीतिक परिदृश्य पर पूरी तरह से खरा उतर रहा...















