राजनीति

धनकड की गति, धनकड जानें, और न जाने कोय

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— राकेश अचल — पू्र्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड जब तक खुद नहीं बोलेंगे तब तक किसी को भी ' धनकड गति ' की हकीकत का पता नहीं चलेगा, और मेरा पक्का यकीन है कि पूर्व...

आखिर बंगाल में नानी नहीं तो माँ की याद आ ही गई

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— राकेश अचल — हमारे देश में कुछ चीजें और रिश्ते ऐसे हैं जो आदमी को गाहे-बगाहे कहीं भी, किसी भी समय और किसी भी उम्र में या तो खुद-ब -खुद याद आ जाते हैं...

पाठ्य पुस्तकों के जरिए ‘हिस्ट्री’ बदलने का ‘हिस्टीरिया’

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— राकेश अचल — आजकल देश के भाग्य विधाताओं को हिस्टीरिया के दौरे फिर पडने लगे हैं. सरकार पाठ्य पुस्तकों के जरिए देश की हिस्ट्री बदलने की कोशिश कर रही है. इस कोशिश का समर्थन...

नेताओं से बेहतर फैसले करते हैं अफसर

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— राकेश अचल — मप्र में 355 फ्लाईओवर और रेलवे ओव्हर ब्रिज की डिजाइन रद्द करने का फैसला कर लोक निर्माण विभाग के सेतु शाखा के ईएनसी शाखा के ईएनसी ने एक नया कीर्तिमान रच...

कांवड यात्रा का अब राजनीतिक कनेक्शन

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— राकेश अचल — सावन का महीना शुरू होते ही उत्तर भारत की प्रमुख धार्मिक यात्राओं में एक 'कांवड़ यात्रा' 11 जुलाई से शुरू हो चुकी है. कांवड़ यात्रा की शुरुआत होती ही उत्तर प्रदेश...

प्रोफेसर किरण सेठ : एक अकेले इंसान ने नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया!

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— प्रोफेसर राजकुमार जैन — 1978 मैं दिल्ली सरकार की कला, साहित्य, संगीत परिषद की सलाहकार समिति का मैं सदस्य था। साहित्य कला परिषद् के सचिव श्री दयाप्रकाश सिन्हा ने एक दिन कहा कि आइआइटी...

लाखों गाँवों में सहकारी संस्थाएं बनाना अमित शाह के लिए बड़ी चुनौती

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— हरीश शिवनानी — पिछले दिनों अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने जो घोषणा की है वो शहरों और महानगरों में रहने वाले लोगों लिए शायद कोई महत्व नहीं रखती हो,...

राजनीतिक शर्म निरपेक्षता और बकवासवाद

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— ध्रुव शुक्ल — कुछ दिनों से यूट्यूब के संग्रह में संचित श्री अटल बिहारी वाजपेयी के भाषण सुन रहा हूॅ़ं। उन्होंने यह तथ्य स्वीकार किया है कि एक समय अपराध करने वाले लोग राजनीतिक...

बेशक बेबाकी से झूठ बोलती है हमारी सरकार

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— राकेश अचल — भारतीय संविधान की प्रस्तावना में धर्मनिरपेक्ष और समाजवाद जैसे शब्दों को बर्दास्त न कर पाने वाली सरकार यदि कहे कि- भारत सरकार आस्था और धर्म से जुड़े विश्वासों और परंपराओं पर...

नोटबंदी के बाद अघोषित वोटबंदी की ओर देश

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— राकेश अचल — लिखने के लिए विषय और मुद्दे कभी समाप्त नहीं होते. बीती रात मैने मप्र की राजनीति पर लिखने का मन बनाया था किंतु लिख रहा हूं बिहार की राजनीति के बहाने...