विनय कुमार सिंन्हा को भावभीनी श्रद्धांजलि!
विनय कुमार सिंन्हा का जाना, समाजवादी आंदोलन के एक वैचारिक,आस्थावान खंबे का ढहना है। किसी भी विचारधारा केप्रचार प्रसार की ध्वजा फहराने में...
श्रद्धांजलि : पर्यावरणविद माधव गाडगिल की याद में
— डॉ. शुभनीत कौशिक —
प्रख्यात पर्यावरणविद प्रो. माधव गाडगिल का कल 7 जनवरी को निधन हो गया। वे प्रो. यशपाल, जयंत नार्लीकर जैसे समकालीन...
श्रद्धांजलि : ज्ञान रंजन
— परिचय दास —
ज्ञान रंजन के न रहने की सूचना किसी एक व्यक्ति के जाने की सूचना नहीं है, यह उस बेचैन चेतना के...
जीने की कला में छेद – डॉ योगेन्द्र
निराला ने एक कविता लिखी है- ‘स्नेह निर्झर बह गया है।’ उस कविता की कुछ पंक्तियां हैं -
‘स्नेह-निर्झर बह गया है !
रेत ज्यों तन...
विनोद कुमार शुक्ल को श्रद्धांजलि!
— परिचय दास —
।। एक ।।
विनोद कुमार शुक्ल का न रहना किसी एक व्यक्ति का न रहना नहीं है, यह उस मौन का उठ...
रिश्तों की मृत्यु कहीं आदमी की मृत्यु तो नहीं! – डॉ...
जापान में एक कंपनी है - फैमिली रोमांस। यह कंपनी लोगों को पिता, पति, दोस्त और अन्य रिश्तेदार उपलब्ध करवाती है। ऐसी कई पेशेवर...
साथी राजनीति प्रसाद नहीं रहे—समझ नहीं आ रहा, क्या-क्या याद करूँ!
— Prof. Raj Kumar Jain —
सेठों, साहूकारों, गद्दीनशीन नेताओं, सियासतदानों तथा अपने घर के बुज़ुर्गों और गुरुओं के नाम पर या उनकी स्मृति में...
समाजवादी आन्दोलन के दधीचि : सुरेंद्र मोहन
— डॉ. सुनीलम —
सुरेन्द्र मोहन जी के मेरी अंतिम बात फोन पर 16 दिसंबर 2010 की रात्रि को हुई थी। जिसमें उन्होंने मुझे 10...
मानवाधिकारः नया परिप्रेक्ष्य
— प्रोफेसर जगदीश्वर चतुर्वेदी —
मानवाधिकारों का एक अन्य क्षेत्र है जो जीवन-मूल्यों की प्रकृति और संरचनाओं से जुड़ा है। हमारे जीवन-मूल्यों का समूचा ढांचा...
पुनर्जागरण की जरूरत और पाखंडियों के स्वर – डॉ योगेन्द्र
विमल राय की एक फिल्म है -’सुजाता ‘। जब मैं महज एक वर्ष का था, तब यह फिल्म बनी थी यानी 1959 में। ब्लैक...
















