भय के बीच अभय का एक प्रसंग

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— विवेक मेहता — आडवाणी जी, अरे वही प्राइम मिनिस्टर इन वेटिंग वाले ने कभी आपातकाल के संदर्भ में कहा था- झुकने का बोला गया...

गांधी-लोहिया मेरे पॉलिटिकल डीएनए में हैं

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— प्रोफेसर राजकुमार जैन — लगभग 65 साल पहले दिल्ली के सोशलिस्टों की संगत में दो नाम महात्मा गांधी और डॉक्टर राममनोहर लोहिया मेरी जबान...

डॉ.वैदिक की कमी को इंदौरी दिल से महसूस करना होगा!

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— श्रवण गर्ग — इंदौर को देश के नागरिक और आप्रवासी भारतीय अलग-अलग शक्लों में जानते हैं पर मालवा का यह खूबसूरत शहर अपनी धुरी...

नंगई का नजारा

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— विवेक मेहता — तिल का ताड़ बनाना हो, राई का पहाड़ खड़ा करना हो, बाल की खाल निकालना हो, बातों का बतंगड़ बनाना हो...

मिस्टर फोर्टी परसेंट

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— विवेक मेहता — भाई लोग बतंगड़ बनाने का कोई भी मौका हाथ से नहीं जाने देते। जोड़-तोड़ से बनी, 40% कमीशन वाली सरकार के...

किस रंग का होता है प्रेम?

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— ध्रुव शुक्ल — छुटपन से ही सुनता आया हूं कि सबको प्रेम के रंग में रंग जाना चाहिए। उन दिनों मन में खयाल आता...

गमला और अमला

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— विवेक मेहता — बात का बतंगड़ बनने में देर ही कितनी लगती है। दो लोग सड़क किनारे फूलों के गमले उठाकर महंगी गाड़ी की...

जन जागें तो बचे लोकतंत्र का मान

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— ध्रुव शुक्ल — सवाल अब यह नहीं है कि चुनाव में अराजकता फैलाने वाले गुण्डे किस राजनीतिक दल के हैं। क्योंकि हरेक दल एक-दूसरे...

बात और बतंगड़

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— विवेक मेहता — बात का बतंगड़ बनाना इसे ही कहते हैं। खबर तो आपने भी पढ़ी होगी। दो रुप्पली वाली। अरे वही, महाराष्ट्र वाली‌।...

कानपुर सम्मेलन में कांग्रेस से क्यों अलग हुए थे समाजवादी!

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— डॉ सुनीलम — समाजवादियों को यह जानना जरूरी है कि 26 से 28 फरवरी 1947 को कानपुर में कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का सम्मेलन 9...