भ्रम पैदा करने का नाकाम प्रयास

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— रमाशंकर सिंह — वरिष्ठ पत्रकार श्री कुरबान अली जी ने एक लेख लिखा जिसमें उन्होंने कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के जनक नेताओं से लेकर सन...

आप कैसे चुप हो सकती हैं!

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— कुमार प्रशांत — निरर्थक बातों का इतना शोर मचा है कि मन तरसने लगा है कि थोड़ी शांति हो कि विवेक की कुछ निर्मल...

अब्दुल हमीद का पराक्रम

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— रमेश यादव — पाकिस्तान ने 1947-49 के दौरान हुई कश्मीर जंग के अनुभवों से सबक न लेकर 1965 में एक बार फिर जंग छेड़...

1942 की एक समानांतर सरकार ‘स्वतंत्र बलिया प्रजातंत्र’

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— विवेकानंद सिंह — 1 सितंबर 1939,दिन शुक्रवार को पोलैंड पर जर्मनी के आक्रमण के साथ ही ही द्वितीय विश्वयुद्ध प्रारंभ हो गया। ब्रितानिया सरकार...

जब शेरपुर के आठ रणबांकुरे ओढ़ लिये थे शहादत का बाना

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— रमेश यादव — स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अगस्त क्रांति जहां अहम अध्याय है वहीं उस क्रांति की 18 अगस्त की तारीख गाजीपुर के...

विभाजन की पीड़ा को क्यों याद किया जाए?

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— सुनील दीपक — आज सुबह कल के स्वतंत्रता दिवस के मोदी जी के भाषण के बारे में पढ़ा तो उनकी ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’...

भारत में मुस्लिम महिला होने का दंश : एक दास्तान

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— नूर महविश — भारत अपने बहु-पारंपरिक और सांस्कृतिक मूल्यों के लिए जाना जाता है। लोग विभिन्न धर्मों का पालन करते हैं, विभिन्न भाषाएं बोलते...

हमें फ़ख्र है कि हमने उस महामानव से बात की है...

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— प्रोफ़ेसर राजकुमार जैन — सीमान्त गांधी लोहिया से बेइन्‍तहा लगाव रखते थे, लोहिया के इंतकाल के बाद 1969 में जब वो हिंदुस्‍तान आए तो...

कब आएगी इनकी आजादी

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— संजय कनौजिया — दिल्ली कैंट क्षेत्र में नौ वर्षीय बच्ची के बलात्कार और निर्मम हत्या ने मुझ जैसे सामाजिक व राजनैतिक कार्यकर्ता को वैसे...

अरण्य संस्कृति में ही गड़ी है हम सबकी गर्भनाल

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— जयराम शुक्ल — एक पत्रकार के नाते जल-जंगल-जमीन और जन पर लिखना-पढ़ना मुझे हमेशा से सुभीता रहा है। वनवासियों पर मेरी समझ किताबों के...