Tag: अम्बेदकर कुमार साहु
डिजिटल असहमति और युवाओं का ‘कॉकरोच मोर्चा’: जब अपमान ही सबसे...
— अम्बेदकर कुमार साहु —
जब राज्य अपनी नीतिगत विफलताओं को छिपाने के लिए अपने ही नागरिकों के अस्तित्व को कीड़े-मकौड़ों की तरह देखने लगे,...
ओस्लो विमर्श और प्राच्यवादी चश्मा: एक समाजशास्त्रीय विवेचना
— अम्बेदकर कुमार साहु —
प्रस्तुत आलेख हालिया अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक घटनाक्रमों के माध्यम से उत्तर-औपनिवेशिक वैश्विक व्यवस्था में निर्मित होने वाले विमर्शों को एडवर्ड सईद...
सिनेमाई चश्मा और सामाजिक यथार्थ: ‘दो दीवाने शहर में’ और जातिगत...
— अम्बेदकर कुमार साहु —
यह लेख फिल्म ‘दो दीवाने शहर में’ (पात्र: ईशान/शशांक और रौशनी/मृणाल ठाकुर) का एक आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। भारतीय...
JNU का मार्ग: मुनिरका
— अम्बेदकर कुमार साहु —
गौरी और दीपक की पहली मुलाकात किसी कैफे या लाइब्रेरी में नहीं, बल्कि मुनिरका की एक बदबूदार गली के उस...
वेलेंटाइन डे: भारतीय संदर्भ में एक समाजशास्त्रीय विश्लेषण
— अम्बेदकर कुमार साहु —
प्रस्तुत आलेख में ‘वेलेंटाइन डे’ का समाजशास्त्रीय नजरिए से विश्लेषण किया गया है। लेख यह तर्क देता है कि वेलेंटाइन...
ज्ञान मीमांसा का स्रोत छठ त्योहार: एक समाजशास्त्रीय विश्लेषण
— अम्बेदकर कुमार साहु —
यह आलेख छठ त्योहार का समाजशास्त्रीय विश्लेषण प्रस्तुत करता है। आलेख छठ त्योहार को ज्ञान मीमांसा का स्रोत मानकर यह...
युवा वर्ग के सन्दर्भ में फिल्म ‘सय्यारा’ की समीक्षा : एक...
— अम्बेदकर कुमार साहु —
फ्रांसीसी समाजशास्त्री और दार्शनिक जीन बॉडरिलार्ड (1929) ने मीडिया, समकालीन संस्कृति और तकनीकी संचार की व्याख्या ‘हाइपररियलिटी’ के संदर्भ में...

















