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भिखारी ठाकुर की सर्जनात्मकता व ‘बिदेसिया’ के नाच ( नाटक)
— परिचय दास —
आवेला असाढ़ मास,
लागेला अधिक आस,
बरखा में पिया घरे
रहितन बटोहिया।
पिया अइतन बुनियाँ में
राखि लिहतन दुनियाँ में
अखरेला अधिका
सवनवाँ बटोहिया।
आई जब मास भादो,
सभे खेली...
भिखारी ठाकुर के बिदेसिया की लोक व्याप्ति – सदानन्द शाही
भिखारी ठाकुर की रचना ‘बिदेसिया’ 1917 में हुई थी। सौ साल होने जा रहे हैं इस महान कृति के। आजकल कृतियों के महत्व का...
मैं जो कई भाषाओं में लिखता हूँ
— परिचय दास —
।। एक ।।
भारतीय साहित्य की परंपरा बहुभाषिकता के अद्भुत उदाहरणों से भरी हुई है। यह बहुभाषिकता केवल भाषाओं के प्रयोग तक...













