उत्तर बंगाल में राजवंशी समुदाय को बांटने की नीति का विरोध

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6 नवंबर। जुगल किशोर रायबीर की पुण्यतिथि के अवसर पर अलीपुर दुआर जिले में जटेश्वर के पास स्थित समता केन्द्र में हुई सभा में उत्तर बंग तपशीली जाति ओ आदिवासी संगठन (उतजाआस) और समाजवादी जन परिषद के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जुगल दा को याद करते हुए राजवंशी समुदाय और कामता भाषा को बांटने के विरोध में आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया। गौरतलब है कि तृणमूल सरकार ने उत्तर बंगाल में राजवंशी अकादमी और कामतापुरी अकादमी की स्थापना की है और उन्हें पांच-पांच करोड़ रुपए भी दिए हैं। उतजाआस के नेताओं का कहना है कि दो अकादमी का गठन कर और कामता भाषा को कई नाम देकर राज्य सरकार राजवंशी समुदाय को बांटना चाहती है। राजवंशी समुदाय की एकता के लिए यह जरूरी है कि यहां की भाषा का एक नाम यानी कामता भाषा हो। राजवंशी कोई अलग अलग समुदाय नहीं बल्कि एक समुदाय है।

उत्तर बंगाल में आठ जिले हैं- मालदा, जलपाईगुड़ी, अलीपुर दुआर, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, दार्जिलिंग, कालिपोंग और कूचबिहार। इन जिलों में राजवंशी, आदिवासी, अति पिछड़ा वर्ग, मुसलिम, इन समुदायों की संख्या अधिक है। गोस्वामी, ब्राह्मण (सवर्ण) भी हैं पर उनकी तादाद कम है। कामता भाषा बोलने वालों की तादाद अधिक है चाहे वो किसी भी समुदाय के हों।

सभा में वक्ताओं ने इस बात पर भी चिंता जताई कि छोटे राज्य को मुद्दा बनाकर भाजपा लोगों को लड़ाने-भिड़ाने का खेल खेल रही है, दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल को किसी भी सूरत में नहीं बंटने देने पर जोर देकर तृणमूल कांग्रेस बंगाली अस्मिता की राजनीति कर रही है। इन दोनों पार्टियों को उत्तर बंगाल की वास्तविक जन आकांक्षाओं से कोई लेना-देना नहीं है।

सभा में वक्ताओं ने उत्तर बंगाल की समस्याओं का विस्तार से जिक्र करने के साथ ही देश में लोकतंत्र, भाईचारे और संविधान के लिए बढ़ते खतरों से भी लोगों को आगाह किया। सभा को उतजाआस, सजप और समता केन्द्र के नेता रंजीत राय, करुणा कांत राय, रूपक बनर्जी, हरेकृष्ण बर्मन, भोलानाथ राय समेत उतजाआस और समाजवादी जन परिषद के प्रमुख लोगों ने संबोधित किया।

– रंजीत कुमार राय

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