असम के मतदाताओं से लोकतांत्रिक नागरिकों की अपील

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मतदाता साथियों,
आप एक निर्णायक समय से गुजर रहे हैं। आपके मतदान से आपके क्षेत्र के नए जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे। असम की नई विधान सभा का गठन होगा और नई निर्वाचित सरकार बनेगी।

आप सबने भाजपा की मौजूदा सरकार का प्रत्यक्ष अनुभव किया है। पिछले पाँच वर्षों में अनेक सरकारी कारगुज़ारियाँ आपके सामने हुई हैं। इनमें से अधिकांश ने असम की गलत छवि गढ़ने का काम किया है। जिस भूमि ने देश को श्रीमंत शंकरदेव जैसे महापुरुष दिए, जिन्होंने जातिगत भेदभाव को तोड़कर असम की सुदृढ़ एकता का मार्ग प्रशस्त किया, उसी असम के लोगों को आज धर्म के नाम पर बाँटा जा रहा है। असम ने हमेशा विविध जातियों और समुदायों के समन्वित जीवन का एक उदाहरण देश के सामने रखा है। आज उसी असम की एकता को भाजपा सरकार छिन्न-भिन्न करने में लगी हुई है।

असम की पहचान के प्रतीक भारतरत्न डॉ. भूपेन हज़ारिका और जुबिन गर्ग जैसे महान कलाकार रहे हैं। उनके मानवीय स्वर और उनकी विराट लोकप्रियता असम की अमूल्य धरोहर हैं। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और भाजपा के शासन में “बूढ़ा लूइत” आज केवल निःशब्द नहीं बह रहा, बल्कि मानो हाहाकार कर रहा है। हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा ने असम को नफ़रत और अत्याचार की प्रयोगभूमि बना दिया है। आज की राजनीति असम की सद्भावपूर्ण सह-अस्तित्व की संगीतमय संस्कृति को विकृत कर रही है। अनेक जातियों और समुदायों के समन्वय से बने असम को भाजपा की सांप्रदायिक राजनीति अशांति और अराजकता की ओर धकेल रही है।

यह मायाजाल भाजपा सरकार अपनी कमियाँ छिपाने के लिए बुन रही है। असम में बेरोज़गारी 2026 की शुरुआत तक एक गंभीर समस्या बन चुकी है। इसका मुख्य कारण शिक्षित बेरोज़गार युवाओं की भारी संख्या, सीमित औद्योगिक विकास और कौशल-असमानता है, जिसके परिणामस्वरूप युवाओं का बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है। औसतन 10 में से 4 युवा बेरोज़गार हैं। शहरों में तो 60 प्रतिशत युवा काम की तलाश में भटक रहे हैं। ऐसा क्यों हुआ? क्योंकि हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार के एजेंडे में जनता के लिए कोई जगह नहीं है। भ्रष्टाचार में डूबी राज्य सरकार लगातार जनता की असली समस्याओं की अनदेखी करती रही है।

आप अपने अनुभव के आधार पर भाजपा की जीवन-विरोधी और जन-विरोधी राजनीति को समझें। उसके झूठे, उत्तेजक, भ्रामक और नफ़रत फैलाने वाले नारों को नकारें। संविधान, समान नागरिकता, मताधिकार, सर्वधर्म समभाव और प्रांतों के स्वायत्त अधिकारों को तोड़ने-मरोड़ने, काटने-छाँटने वाली भाजपा को कतई वोट न दें।

अपीलकर्ता
• प्रोफेसर आनंद कुमार, संयोजक, लोकतांत्रिक राष्ट्रनिर्माण अभियान
• मंथन, सह-संयोजक, लोकतांत्रिक राष्ट्रनिर्माण अभियान
• मणिमाला, सह-संयोजक, लोकतांत्रिक राष्ट्रनिर्माण अभियान
• दीपक ढोलकिया, सह-संयोजक, लोकतांत्रिक राष्ट्रनिर्माण अभियान
• ज्ञानेंद्र, सह-संयोजक, लोकतांत्रिक राष्ट्रनिर्माण अभियान
• मनीषा बनर्जी, सह-संयोजक, लोकतांत्रिक राष्ट्रनिर्माण अभियान
• किरण निशांत, सह-संयोजक, लोकतांत्रिक राष्ट्रनिर्माण अभियान
• गुड्डी, सह-संयोजक, लोकतांत्रिक राष्ट्रनिर्माण अभियान
• प्रो. शशि शेखर सिंह, सह-संयोजक, लोकतांत्रिक राष्ट्रनिर्माण अभियान
• जयंत दीवान, कोषाध्यक्ष, लोकतांत्रिक राष्ट्रनिर्माण अभियान
• प्रोफेसर अरविंदर अंसारी, महासचिव, सोसाइटी फॉर कम्युनल हार्मनी
• डॉ. हरीश खन्ना, पूर्व विधायक
• एन. डी. पंचोली, प्रसिद्ध वकील, सुप्रीम कोर्ट
• प्रो. उमाशंकर, सेवानिवृत्त प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय
• प्रो. उमा गुप्ता, दिल्ली विश्वविद्यालय
• एस. आर. हिरेमठ, पूर्व अध्यक्ष, सिटीजंस फॉर डेमोक्रेसी
• तेजिंदर सिंह आहूजा, महासचिव, पीयूसीएल, दिल्ली
• दया सिंह, अध्यक्ष, अखिल भारतीय पीस मिशन
• डॉ. अजीत झा, भारत जोड़ो अभियान
• प्रो. अशोक सिंह, पूर्व प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय
• प्रो. खालिद अशरफ, अध्यक्ष, जनवादी लेखक संघ, दिल्ली
• मीर शाहिद सलीम, पत्रकार, जम्मू एवं कश्मीर
• राम शरण, लोकतांत्रिक राष्ट्रनिर्माण अभियान
• डॉ. प्रदीप कुमार, दिल्ली विश्वविद्यालय
• प्रो. मृदुला झा, प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय


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