मधु लिमये पर धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव की कविता!

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Madhu Limaye

अपना बुलबुल
घोषित कर दो
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आम विदेशी जामुन काली
पत्थर को फल घोषित कर दो।
हार गया बंगाल विजेता
दिल्ली का दल घोषित कर दो।

रोज रोज आरोप झेलने
से अच्छा है लाल किला से,
वर्दी को अपनी पाटी का
सर्वोत्तम बल घोषित कर दो।

इतना नाटक, इतना खर्चा,
करने से अच्छा है राजन,
देव मशीनों को बतलाओ
जन को ही खल घोषित कर दो।

शर्म हया बेकार बताकर,
एप्सटीन की जय जय बोलो,
राजनीति को दो का धंधा
राजधर्म छल घोषित कर दो।

बुरा नहीं मानेगी दुनियां,
हम भी नहीं कहेंगे गड़बड़,
जन सुराज को अपनी मैना,
अपना बुलबुल घोषित कर दो।

जंगल को सांपों की बस्ती,
खेतों को घाटे का सौदा,
दरिया के पावन घाटों को,
मैला आंचल घोषित कर दो।

एक गुजारिश मेरी भी है,
मधुलिमये के जन्म दिवस पर,
गांधी लोहिया जयप्रकाश को,
अरबन नक्सल घोषित कर दो।


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