पटाखों से मत लड़ो !

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— प्रेरणा — मैं इस उलझन में हूं कि किसी को यह कैसे समझाऊं कि आपकी समझ कोई 80-90 साल पुरानी है; और इतनी खतरनाक...

नेहरू का रचनात्मक राष्ट्रवाद

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— नीरज कुमार — जवाहरलाल नेहरू आधुनिक भारत के एक सुलझे हुए राजमर्मज्ञ थे। नेहरू जी का राजनीति-दर्शन उन जीवंत विचारों में निहित है जो...

महिलाओं की पूजा और लंबी उम्र की कामना के लिए भी...

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— दिवेश रंजन — साल में ऐसे कई पर्व हैं जिसमें बहनें अपने भाइयों के लिए व्रत रखती हैं और पूजा करती हैं लेकिन ऐसा...

सांप्रदायिक ताकतों की फितरत

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— मुनेश त्यागी — सभी तरह की साम्प्रदायिक ताकतें वैसे तो अपने अपने धर्म की बातें करती हैं। पर असल में ये ताकतें धर्म की...

पर्व बनाम प्रदूषण

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— जयराम शुक्ल — दीपावली की रात के बाद होनेवाली सुबह अजीब मनहूसियत से भरी होती है। वैसे भी यह परीबा (प्रतिपदा) का दिन होता...

भाईजी का जीवन एक नदी की तरह था

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— रमेश चंद्र शर्मा — शब्द, बोल, विचार, सर्व धर्म प्रार्थना, गीत, संगीत, अच्छे कर्म, साधना, मौन, श्रम कभी मरते नहीं हैं। कभी विविध कारण...

गांव बदलेगा तो देश बदलेगा

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— हिमांशु जोशी — बंगाल या फिर केरल के गांवों में आप घूमेंगे तो आपको वहां पब्लिक लाइब्रेरी आसानी से दिख जाएंगी। बंगाल ने उस...

गीत गानेवाले एक सिपाही का अवसान

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— कुमार प्रशांत — सिपाही का अवसान शोक की नहीं, संकल्प की घड़ी होती है। सलेम नानजुन्दैया सुब्बाराव या मात्र सुब्बाराव जी या देशभर के...

जी हाँ, हम अंधभक्‍त हैं, आज का बुद्धिजीवी, शब्‍दों का मकड़जाल,...

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— प्रोफ़ेसर राजकुमार जैन —  (छठी किस्त) असमिया के प्रख्‍यात साहित्‍यकार, ज्ञानपीठ पुरस्‍कार विजेता, साहित्‍य अकादमी के भू.पू. अध्‍यक्ष वीरेन्‍द्र कुमार भट्टाचार्य लिखते हैं कि “जब लोहिया नेफा...

जी हाँ, हम अंधभक्‍त है, क्‍या राजनैतिक इतिहासकार रामचंद्र गुहा ,एनडीटीवी...

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— प्रोफ़ेसर राजकुमार जैन — (पाँचवीं किस्त) राजनैतिक विश्‍लेषक, इतिहासकार रामचंद्र गुहा द्वारा संपादित प्रस्‍तुत पुस्‍तक ‘मेकर्स ऑफ मॉडर्न इंडिया’ में एक पूरा अध्‍याय राममनोहर लोहिया पर...