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भिखारी ठाकुर की सर्जनात्मकता व ‘बिदेसिया’ के नाच ( नाटक)
— परिचय दास —
आवेला असाढ़ मास,
लागेला अधिक आस,
बरखा में पिया घरे
रहितन बटोहिया।
पिया अइतन बुनियाँ में
राखि लिहतन दुनियाँ में
अखरेला अधिका
सवनवाँ बटोहिया।
आई जब मास भादो,
सभे खेली...











