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Tag: Contemporary Hindi Poetry

सुरेन्द्र वाजपेयी के तीन गीत

1. आशंका जहाँ-तहाँ गड़बड़झाला है,      जाने क्या होने वाला है!   रंग बदलते कानूनों के, तेवर बदल गये, सीमाओं से बाहर आखिर, रिश्ते निकल गये,      अधिकारों के नंगे...

राम जन्म पाठक की सात कविताएँ

रात : एक   रात, गहरी रात है डूबता है एक सितारा और अपनी गर्त में बाँहों में सिमटता जा रहा हूँ उस अमा के खाँसती है चाँदनी और फिर मखमली सपने तिमिर...

कवि-कर्म का पुनर्शोध

— रामप्रकाश कुशवाहा — अपने सम्वेदनाधर्मी शिल्प के कारण निलय उपाध्याय की कविताएं विशिष्टता का अलग प्रतिमान रचती हैं। अपनी छठी कविता-पुस्तक दहन राग संग्रह की कविताओं को  वरिष्ठ कवि...

मदन कश्यप की पाँच कविताएं

1. खो गया है   नदी भी है और गांव भी है बस घाट कहीं खो गया है   दूर दूर रहने या डूब डूब जाने से अलग एक शीतल स्पर्श का बाट कहीं खो...

अनुपम की पाँच कविताएँ

1. सर्वोदय दैनन्दिनी पर गांधी छवि    हे महान ! क्या पड़ी थी आपको उजड़े घर बसाने की करुणा हो जाने की बुद्ध मूसा, ईसा, मोहम्मद सबको आत्मसात कर परमहंस जहाँ पहुँचे ध्यान कर वहाँ...

देवेन्द्र आर्य की कविताएं

बोलो कौन डूबेगा?   देख कर औक़ात बोलो शहर या देहात बोलो आख़िरी लमहात,  बोलो कौन डूबेगा? सौ की सीधी बात,  बोलो कौन डूबेगा?   ज़िन्दगी किसकी ज़रूरी है और किसकी ख़ानापूरी है क़ीमती हैं...

श्रवण गर्ग की चार कविताएं

नहीं मरा है कोई ऑक्सिजन की कमी से कहीं ! मान सकते हैं आप इसे एक शुरुआत भी नहीं बचे रहने की हममें किसी इंसान की...

अनामिका अनु की कविताएँ

1.लोकतंत्र   खरगोश बाघों को बेचता था फिर अपना पेट भरता था बिके बाघ खरीदारों को खा गये फिर बिकने बाजार में आ गये   2. लड़कियाँ जो दुर्ग होती हैं   जाति को कूट पीस...

गगन गिल की पाँच कविताएं

तुम्हें भी तो पता होगा मैं क्यों दिखाऊँगी तुम्हें निकाल कर अपना दिल   तुम्हें भी तो पता होगा   कहाँ लगा होगा पत्थर कहाँ हथौड़ी   कैसे ठुकी होगी कुंद एक कील किसी ढँकी हुई जगह...

विमल कुमार की पाँच कविताएँ

1. मेरा चाँद   कहाँ  गया मेरा चाँद लगता है वो कभी था ही नहीं मेरे आसमान पर अगर वो होता तो जरूर आता मेरे बाम पर   उतरता सीढ़ियों  से नीचे धीरे  धीरे फिर...

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