संयुक्त किसान मोर्चा ने चेताया, सरकार बिजली संशोधन बिल पेश करने से बाज आए

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4 अगस्त। संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र सरकार को इस संसदीय सत्र में विद्युत (संशोधन) विधेयक 2022 पेश करने और पारित करने के खिलाफ चेतावनी दी

सरकार द्वारा इस विधेयक पर एसकेएम के साथ कोई परामर्श नहीं किया गया है, जैसा कि लिखित में वादा किया गया था

एसकेएम ने विधेयक के पेश/पास होने पर तत्काल बड़े पैमाने पर विरोध का राष्ट्रव्यापी आह्वान किया है, और कहा है कि वह बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की राष्ट्रीय समन्वय समिति द्वारा राष्ट्रव्यापी कार्रवाई के आह्वान का समर्थन करता है

संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि उसे मिली जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार वर्तमान संसदीय सत्र में विद्युत (संशोधन) विधेयक 2022 को पेश और पारित कर सकती है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पहले ही विधेयक को मंजूरी दे दी है।

इस विधेयक को वापस लेना किसानों के साल भर से ज्यादा लंबे संघर्ष की प्रमुख मांगों में से एक था। 9 दिसंबर, 2021 को केंद्र सरकार ने एसकेएम को लिखे पत्र में कहा था, “4) बिजली बिल में किसान पर असर डालनेवाले प्रावधानों पर पहले सभी स्टेकहोल्डर्स/संयुक्त किसान मोर्चा से चर्चा होगी। मोर्चा से चर्चा होने के बाद ही बिल संसद में पेश किया जाएगा।” पिछले आठ महीनों में ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई है। इसलिए, यह केंद्र सरकार के स्वयं के लिखित आश्वासन के साथ एक बड़ा विश्वासघात है।

विद्युत (संशोधन) विधेयक 2022 का उद्देश्य बिजली वितरण के क्षेत्र में निजी कंपनियों का प्रवेश सुगम करना है। यह हमारे देश के किसानों और अन्य सभी वर्गों के लोगों के लिए बिजली दरों में बढ़ोतरी करके निजी कंपनियों को भारी मुनाफा देगा। क्रॉस सब्सिडी खत्म हो जाएगी। किसानों को मुफ्त या सस्ती बिजली खत्म हो जाएगी। किसानों की उत्पादन लागत और बढ़ेगी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिजली की घरेलू दरों में जबरदस्त वृद्धि होगी। बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की नौकरी पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

संयुक्त किसान मोर्चा ने गुरुवार को जारी बयान में कहा है कि विद्युत (संशोधन) विधेयक 2022 पेश/पास होने पर संयुक्त किसान मोर्चा तत्काल बड़े पैमाने पर राष्ट्रव्यापी विरोध का आह्वान करता है। एसकेएम बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की राष्ट्रीय समन्वय समिति द्वारा, 9 अगस्त को राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन, और अगर सरकार एकतरफा इस विधेयक को पेश और पारित करती है तो काम बंद करने, के राष्ट्रव्यापी कार्रवाई के आह्वान का पूरी तरह से समर्थन करता है।

जारीकर्ता –
डॉ दर्शन पाल, हन्नान मोल्ला, जोगिंदर सिंह उगराहां, युद्धवीर सिंह, योगेंद्र यादव

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