8 सितंबर। भारत जोड़ो यात्रा का दूसरा दिन सुबह 7 बजे विवेकानंद कॉलेज कन्याकुमारी में ध्वजारोहण के साथ शुरू हुआ। यात्रा कन्याकुमारी से 13 किमी चलकर नागरकोइल पहुंची। नागरकोइल सेकेंडरी स्कूल में, तीन जिलों — कन्याकुमारी, तिरुनेवेली और थूथुकुडी के स्थानीय कार्यकर्ताओं और आंदोलनों के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने यात्रियों से मुलाकात की और स्थानीय मुद्दों को उठाया। इस बातचीत के दौरान सबसे प्रमुख चिंता स्थानीय आबादी को प्रभावित करनेवाले पर्यावरणीय क्षरण और जलवायु परिवर्तन की थी।
स्थानीय कार्यकर्ताओं ने कन्याकुमारी में एक अंतरराष्ट्रीय कंटेनर बंदरगाह के निर्माण का मुद्दा उठाया। इस बंदरगाह के बनने से 67 गांव और स्थानीय मछुआरे प्रभावित होंगे। स्थानीय मछुआरों ने बताया कि कैसे एक झूठी रिपोर्ट पर बंदरगाह का निर्माण किया जा रहा है, और विभिन्न पर्यावरणीय चिंताओं की अवहेलना की जा रही है। स्थानीय कार्यकर्ताओं ने थूथुकुडी में वेदांता के स्टरलाइट प्लांट का मुद्दा भी उठाया। 2018 में, अन्नाद्रमुक सरकार के तहत तमिलनाडु पुलिस ने स्टरलाइट प्लांट का विरोध कर रहे 13 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। जबकि प्लांट तब से बंद है, केंद्र सरकार की ओर से प्लांट को फिर से शुरू करने का दबाव है।

एक अन्य प्रमुख चिंता उदनगुडी, थूथुकुडी में कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट का निर्माण था। हालांकि कोयले से चलनेवाले पावर प्लांट बनाने और चलाने के लिए महँगे होते हैं, और प्रदूषण और पर्यावरणीय क्षरण का कारण हैं, और जबकि सौर ऊर्जा की एक बड़ी क्षमता है, सरकार कोयला पावर प्लांट के निर्माण में टस से मस नहीं हो रही है। स्थानीय लोगों को संदेह है कि यह अडानी, जो एक बड़ा कोयला आधारित व्यापार चलाते हैं, को लाभ पहुंचाने के लिए एक योजना है। इसी तरह की चिंता कुडनकुलम से भी आई, जहां परमाणु ऊर्जा पावर प्लांट से गर्म पानी का निर्वहन स्थानीय परितंत्र को प्रभावित कर रहा है। स्थानीय लोगों ने पूरे पश्चिमी घाट पर खुले गड्ढे में खनन और पत्थर उत्खनन के कारण पर्यावरण क्षरण का मुद्दा भी उठाया। एक अन्य मुद्दा चेन्नई सलेम आठ-लेन एक्सप्रेस-वे के निर्माण का था, जिसे चेन्नई और सलेम के बीच पहले से ही चार राजमार्ग मौजूद होने के बावजूद बनाया जा रहा है।
पूरी यात्रा के दौरान यात्रियों को गर्मजोशी से स्वागत और उत्साहपूर्ण समर्थन मिला। लोगों ने अपना समर्थन व्यक्त किया और (भारत को एकजुट करने के लिए) भारत जोड़ो के नेक काम के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। यात्रा शाम छह बजे नागरकोइल में समाप्त हुई।
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