माननीय प्रधानमंत्री
भारत सरकार
विषय: NEET परीक्षा में पेपर लीक की घटना के बाद युवाओं द्वारा शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान के त्यागपत्र की मांग के समर्थन में।
महोदय,
दिनांक 3 मई, 2026 को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा NEET की प्रतियोगी परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा के प्रश्नपत्र के लीक होने की पुष्टि के बाद 12 मई, 2026 को शिक्षा विभाग ने परीक्षा रद्द कर दी। इस परीक्षा में 22 लाख से अधिक अभ्यर्थी सम्मिलित हुए थे। पेपर लीक की घटना से उत्पन्न निराशा और मानसिक तनाव के कारण 20 से अधिक युवा परीक्षार्थियों द्वारा आत्महत्या जैसे अत्यंत दुःखद कदम उठाए जाने की खबरें सामने आईं।
यह उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में भी NEET परीक्षा में पेपर लीक की घटनाएं सामने आई थीं और अनेक परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। उस समय भी देश के शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान थे और आज भी वही शिक्षा मंत्री हैं। किंतु अपने मंत्रालय की लगातार विफलताओं की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए उन्होंने न तब त्यागपत्र दिया और न ही अब तक दिया है।
इतना ही नहीं, NEET प्रकरण अभी शांत भी नहीं हुआ था कि CBSE की कक्षा 12 की परीक्षा में डिजिटल मार्किंग प्रणाली (OSM) की कमियों को लेकर लगभग 18 लाख विद्यार्थियों में व्यापक असंतोष, बेचैनी और निराशा देखने को मिली। इस नई मूल्यांकन प्रणाली ने भी शिक्षा मंत्रालय की प्रशासनिक कमियों को उजागर किया तथा शिक्षा मंत्री की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े किए।
इन घटनाओं के विरोध में देशभर के युवाओं ने अनेक शहरों में शिक्षा मंत्री के त्यागपत्र की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए। विगत 20 जून, 2026 से राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों युवा ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नामक ऑनलाइन गठित संगठन के नेतृत्व में शांतिपूर्ण सत्याग्रह और धरना दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त, 28 जून, 2026 से प्रसिद्ध पर्यावरणविद श्री सोनम वांगचुक भी इस मांग के समर्थन में आमरण अनशन पर हैं। उनके साथ आइसा (AISA) छात्र संगठन के छह युवा भी आमरण अनशन कर रहे हैं।
संसदीय लोकतंत्र में मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। ऐसी स्थिति में किसी मंत्रालय की गंभीर एवं निरंतर विफलताओं की नैतिक जिम्मेदारी संबंधित मंत्री द्वारा स्वीकार किया जाना लोकतांत्रिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि मंत्री स्वयं त्यागपत्र नहीं देते, तो शासन प्रमुख के रूप में प्रधानमंत्री का यह दायित्व है कि वे अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए उनसे त्यागपत्र मांगें। यदि इसके बाद भी मंत्री पद पर बने रहें, तो प्रधानमंत्री राष्ट्रपति महोदया को सलाह देकर उन्हें मंत्रिपद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया प्रारंभ करें।
दुर्भाग्यपूर्ण है कि अब तक न तो शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए त्यागपत्र दिया है और न ही उन्हें पद से हटाने के लिए कोई पहल की गई है।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि लोकतंत्र में जनता तथा विशेष रूप से युवाओं का विश्वास बनाए रखने, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पुनर्स्थापित करने और शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए शिक्षा मंत्री को पद से हटाने की आवश्यक कार्रवाई करें। साथ ही, NTA जैसी अत्यधिक केंद्रीकृत परीक्षा एजेंसी पर अखिल भारतीय प्रतियोगी परीक्षाओं का अत्यधिक बोझ कम करते हुए एक अधिक विकेंद्रीकृत, पारदर्शी और उत्तरदायी परीक्षा व्यवस्था विकसित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि युवाओं का परीक्षा प्रणाली में विश्वास पुनः स्थापित हो सके और उनका भविष्य सुरक्षित बनाया जा सके।
आशा है कि आप इस विषय की गंभीरता को देखते हुए शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करेंगे।
सधन्यवाद।
भवदीय,
प्रो. आनंद कुमार
अध्यक्ष
लोकतांत्रिक राष्ट्रनिर्माण अभियान
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