सम्पूर्ण क्रांति दिवस पर धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव की कविता!

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jai prakash narayan and indira gandhi

एक मांग है बन्द दमन
हो किसी शर्त पर
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खुशबू से गुलज़ार चमन
हो किसी शर्त पर।
ख़ुशियों से लबरेज वतन
हो किसी शर्त पर।

पीला, लाल, सफेद, हरा
हो या सूखा हो,
हर पत्ता, हर फूल मगन
हो किसी शर्त पर।

पूरब, पश्चिम, उत्तर,
दख्खिन नीचे ऊपर,
सभी तरफ श्रृंगार अमन
हो किसी शर्त पर।

हर दिन छत पर उड़े
कबूतर, बुलबुल फुदके,
जंगल में भयमुक्त हिरन
हो किसी शर्त पर।

गूंजे सोहर, कजरी, ठुमरी,
बिरहा, चइता,
आंगन में हँसता बचपन
हो किसी शर्त पर।

शाम ढले जब लौट परिंदे
घर को आयें,
दरवाजे पर नात, भजन
हो किसी शर्त पर।

दरिया का पानी घाटों
पर जब इतराए,
स्वागत में उसके चंदन
हो किसी शर्त पर।

होरी, धनिया, जुम्मन,
रजिया, कल्लू की भी,
एक मांग है बन्द दमन
हो किसी शर्त पर।

युद्ध विनाशक थोप रहे
हैं जो हत्यारे,
उनके सिर पर शीघ्र कफन
हो किसी शर्त पर।


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