राजनीति

अपराजेय नहीं है भाजपा

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— श्रीनिवास — कल 12 नवंबर को हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए मतदान हुआ। गुजरात में अभी देर है। मैदान में ताल ठोंक रहे दलों के अलावा सभी मान रहे हैं कि हिमाचल में...

प्रतिनिधि वापसी के जनाधिकार की जरूरत

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— विनोद कोचर — चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर, भावी राजनीतिक दल के संविधान हेतु, पदयात्रा के दौरान जनता से सुझाव मांग रहे हैं, और उन सुझावों को वे सार्वजनिक भी कर रहे हैं। उन्हें एक...

खेल, खेल ना रहा!

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— प्रो. राजकुमार जैन — हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच की मुनादी होते ही दोनों मुल्कों में खलबली मच जाती है, जुनूनी माहौल फैलने लगता है। खेल में जीतने से ज्यादा एक दूसरे को पटकनी...

ऋषि सुनक की कामयाबी पर हमें क्यों खुश होना चाहिए?

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— राजू पाण्डेय — ऋषि सुनक के ब्रिटिश प्रधानमंत्री बनने के बाद सोशल मीडिया में एक अजीब सा उन्माद देखा गया। कुछ बड़े ही रोचक शीर्षक भी नजरों से गुजरे - ब्रिटेन में ऋषि राज,...

सुनक इंग्लैंड का ही हितसाधन करेंगे, भारत का नहीं

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— रमाशंकर सिंह — यह क्या ही घटिया बात हुई कि ऋषि सुनक (या सौनक) का परिवार आजादी के पहले के हिंदुस्तान या अविभाजित भारत के गुजरांवालॉं में रहता था जो अब पाकिस्तान में है...

आरएसएस का असल एजेंडा क्या है

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— विनोद कोचर — इलाहाबाद में 16 से 19 अक्टूबर 2022 को आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में, आरएसएस के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि, "देश में...

क्या कांग्रेस में बदलाव की शुरुआत हो चुकी है?

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— राजू पाण्डेय — कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगानेवाले कांग्रेस-विरोधियों को निराश करते हुए पार्टी के अध्यक्ष पद का बहुप्रतीक्षित और बहुचर्चित चुनाव अंततः लोकतांत्रिक रीति से सफलतापूर्वक संपन्न हो गया और मल्लिकार्जुन खड़गे...

संविदा प्रथा अभिशाप है

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— धर्मेन्द्र श्रीवास्तव — ओड़िशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने संविदाकर्मियों/श्रमिकों को नियमित करने का निर्णय लिया है, यह बहुत ही स्वागतयोग्य कदम है। संविदा प्रथा अभिशाप है। पूर्व में संविदाकर्मियों का बेइंतहा शोषण होने...

आज के संदर्भ में स्वराज के सूत्र

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— सुनील सहस्रबुद्धे और चित्रा सहस्रबुद्धे — वर्तमान शासन के बारे में समझ यह बन रही है कि यह अधिनायकवादी है, भारतीय संविधान का सम्मान नहीं करता है, वैश्विक पूँजी के साथ मेल में और...

आज के भारत में विषमता कितनी है

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— रमाशंकर सिंह — विदेशमंत्री जयशंकर का यह ताजा बयान कि भारत प्रति व्यक्ति 2000 डॉलर (160000 रु. आय प्रतिवर्ष यानी करीब 13333 रु प्रतिमाह यानी 438 रु रोज) की अर्थव्यवस्था है, भी अर्धसत्य है...