2025 इंचियोन अंतर्राष्ट्रीय शांति सम्मेलन

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2025 Incheon International Peace Conference

ग्यॉंगइन नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ एजुकेशन और भारत का हरिजन सेवक संघ शैक्षिक एवं शांति कार्यक्रम समझौते पर हस्ताक्षर

इंचियोन, 4 सितम्बर 2025 — ग्यॉंगइन नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ एजुकेशन (दक्षिण कोरिया) और भारत का हरिजन सेवक संघ ने एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत दोनों संस्थान शैक्षिक आदान-प्रदान, सूचना साझा करने, संयुक्त अनुसंधान तथा शांति कार्यक्रमों के संचालन में सहयोग करेंगे।
हस्ताक्षर समारोह ग्यॉंगइन नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ एजुकेशन के परिसर में आयोजित हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अध्यक्ष किम वांग-जून, विभिन्न प्रशासनिक अधिकारी, तथा भारत से आए शांति प्रतिनिधिमंडल के सदस्य उपस्थित थे। भारत की ओर से हरिजन सेवक संघ के अध्यक्ष शंकर कुमार सन्याल, ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर गांधी शांति फाउंडेशन के अध्यक्ष कुमार प्रशांत और गांधी फाउंडेशन के अध्यक्ष तुषार अरुण गांधी विशेष रूप से शामिल हुए।

अध्यक्ष किम वांग-जून का वक्तव्य

“इस समझौते से हमें शैक्षिक आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान, शैक्षिक उपलब्धियों के साझा करने और शांति कार्यक्रमों में साथ काम करने का अवसर मिलेगा। मुझे विश्वास है कि हरिजन सेवक संघ के साथ मिलकर हम न केवल इंचियोन बल्कि विश्व शांति में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे।”

ग्यॉंगइन नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ एजुकेशन (दक्षिण कोरिया), से प्रो. किम वांग-जून – अध्यक्ष, प्रो. जे-हैंग ली – डीन, छात्र मामले ,प्रो. ह्योन-उक जॉन्ग – डीन, सामान्य प्रशासन प्रो. डोंग-ही ली – निदेशक, अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान एवं बाह्य सहयोग केंद्र,श्री डोंग-हुन किम – प्रमुख, योजना विभाग,श्री सियोंग-मिन पार्क – टीम लीडर, आजीवन शिक्षा केंद्र,श्री गिल-ओ हॉग – टीम लीडर, अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान एवं बाह्य सहयोग केंद्र भारत का शांति प्रतिनिधिमंडल में शंकर कुमार सन्याल – अध्यक्ष, हरिजन सेवक संघ,तुषार अरुण गांधी – अध्यक्ष, गांधी फाउंडेशन कुमार प्रशांत – अध्यक्ष, गांधी शांति फाउंडेशन,श्रीमती शिखा सन्याल – सचिव, पश्चिम बंगाल, हरिजन सेवक संघ,श्री पी. मारुति – अध्यक्ष, तमिलनाडु, हरिजन सेवक संघ,संजय राय – सचिव, क्वांग सुंग किम – कार्यकारी अध्यक्ष, इंचियोन शांति सम्मेलन ,उप निदेशक, Incheon Ilbo (इंचियोन इल्बो)
यून-जंग ली – टीम लीडर, सोपूग टूर

यह समझौता दोनों देशों के बीच शैक्षिक, सांस्कृतिक और शांति प्रयासों को नई दिशा देगा और आने वाले वर्षों में भारत तथा दक्षिण कोरिया के संबंधों को और सुदृढ़ करेगा।


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