परिचय ,,,,,,,,,
जन्म,,,, 23 मार्च 1909
ग्राम जमालपुर,अंचल हजीपुर जिला वैशाली ।
पिता , एक साधारण किसान नाम,,,,,,चुल्हाई सिंह।
माता,, दौलत देवी ।बसावन सिंह अपने माता पिता के एक मात्र सन्तान।8वर्ष की उम्र में ही पिता का देहांत । पहली पत्नी से एक पुत्र प्रोफेसर अरुण कुमार जो 1977 में लालगंज बिधान सभा क्षेत्र से बिधायक चुने गए ।ये महेस प्रसाद साइंस कॉलेज में प्रोफेसर रहे है ।
दूसरीपत्नी ,,, कमला सिन्हा पूर्व विदेश राज्य मंत्री
तीन पुत्री ,,, एक जिसकी शादी गया जिले में हुई ।
गणतन्त्र की जननी वैशालीजो भगवान महावीर की जन्म भूमि और भगवान बुद्ध की कर्मभूमि के साथ ही दानवीर बाबू लंगट सिंह,महान क्रांतिकारी ओर साम्यवादी नेता बाबू किशोरी प्रसन्न सिंह, अमर शहीद बैकुंठ शुक्ल,शेरे बिहार बाबू योगेंद शुक्ल औरक्रांति वीर बाबू बसावन की जन्म भूमि के रूप में जानी जाती है।
बसावन बाबू की शिक्षा , वचपन में ही पिता के मरने के बाद बसावन बाबू का लालन पालन उनकी माँ ने किया ।इनको कोई दूसरा भाई या वहन नही था।बसावन बाबू वचपन से ही कुशाग्र वुद्धि के थे तथा इनको प्राइमरी स्कूल से ही वजीफा मिलता था।सन 1920 में महात्मा गांधी के हजीपुर आगमन पर उनको देखने बसावन बाबू हजीपुर आये और इसके बाद इनके मन मे देश की आजादी की बात बैठ गई। हजीपुर उन दिनों देश के क्रांतिकारी आंदोलन का गढ़ था ,ये मा से छुपा कर क्रांतिकारी योगेंद शुक्ल, किशोरी बाबू के सम्पर्क में आ गए । 1926 में मेट्रिक करने के बाद इन्होंने मा को खुश करने के लिये मुजफ्फरपुर के भूमिहार ब्राह्मण कॉलेज ,अब लँगट सिंह कॉलेज में आई ए में नामांकन कराया लेकिन कॉलेज से इनको क्रांतिकारियों के साथ सम्पर्क की वजह से निकाल दिया गया और 1926 में ही बसावन बाबू 18 वर्ष की उम्र में योगेंद शुक्ल के हिंदुस्तान सोसलिस्ट रिपवलिक आर्मी में शामिल होगये जहाँ ईनका सम्पर्क चन्द्र शेखर आजाद और भगत सिंह के साथ हुआ और बसावन बाबू ने क्रांतिकारियों के साथ मिलकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष छेड़ दिया। काकोरी कांड, लाहौर षड्यंत्र केश ,तिरहुत षड्यंत्र केश में इनका नाम आया ।
1929 में बसावन बाबू लाहौर षड्यंत्र केश में गिरफ्तार हुए जिसमे भगत सिंह सहित तीन साथियों को फांसी की सजा हुई और बसावन बाबू साक्ष्य के अभाव में रिहा हुए।लेकिन तिरहुत षड्यंत्र केश में इन्हें गिरफ्तार कर इनको 1 जून 1930 को पटना बांकी पुर जेल में रखा गया जहाँ से बसावनबाबू तीसरे दिन ही जेल की दीवार फांद कर फरार हो गए।बाद में पुनः गिरफ्तार हुए और इन्हें तिरहुत षड्यंत्र केश में 10 वर्ष की सजा हुई और इन्हें भागलपुर जेल में रखा गया जहाँ इन्होंने जेल में अमानवीय व्यवस्था के खिलाफ 58 दिनों तक अनशन किया बाद में इन्हें गया केंद्रीय जेल में रखा गया जहाँ से 1936 में येरिहा हुए।
राजनीतिक सफर , जेल से निकलने के बाद बसावन बाबू कांग्रेस पार्टी से जुड़े जहाँ उनका सम्पर्क रामबृक्ष बेनीपुरी, जयप्रकाश नारायण,और नेताजी शुभाष चन्द्र बोष से हुआ और बसावन बाबू ने 1936 में रामबृक्ष बेनीपुरी के साथ मिलकर कांग्रेस सोसलिस्ट पार्टी का गठन किया जिसके अध्य्क्ष बसावन बाबू हुए। शुभाष चन्द्र बोस के साथ बसावन बाबू मजदूर आंदोलन से जुड़े।रेलवे कर्मचारी यूनियन के ये उपाध्यक्ष थे।इन्हों ने जपला सीमेंट फैक्ट्री ओर डालमियानगर मिल मजदूरों का संघठन किया तथा हिन्द मजदूर सभा का अखिल भारतीय संघठन खड़ा किया और आजादी के बाद 1948 में इन्होंने ने प्रजा सोसलिस्ट पार्टी की स्थापना की। बसावन बाबू आजादी के आंदोलन में अपना अमूल्य जीवन का 15 बर्ष अंग्रेजो की जेल में बिताया।
प्रथम चुनाव 1952 से 1962 तक बसावन बाबू डेहरी से बिधान सभा के सदस्य और बिधान सभा मे बिपक्ष के नेता रहे और 1967 में बिहार में बनी मिली जुली सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। 1975 में आपात काल के विरोध में भूमिगत होकर आंदोलन चलाते रहे और इनपर दवाव देने के लिये कांग्रेसी सरकार ने इनकी पत्नी कमलासिंहा को मीसा के अंदर नजरबन्द कर दिया।
1977 के बिधान सभा चुनाव में बसावन बाबू डेहरी से बिधायक चुने गए ।
कमला सिन्हा से शादी , आजादी के आंदोलन के दौरान बसावन बाबू की भेंट कमला सिन्हा से कलकत्ता में हुई ओ कमला सिन्हा श्याम प्रसाद मुखर्जी की भतीजी है ।कमला सिन्हाभी बसावन बाबू के साथ मजदूर आंदोलन में जुड़ गई और उनके साथ डेहरी ऑन सोन आश्रम में रहने लगी जहा बसावनबाबू ने कमला सिंह से शादी की जिससे तीन लड़की हुई जिसमें एक कि शादी गया जिले में हुई है। बसावन बाबू की 7 अप्रैल 1989 कोमृत्यु होने के बाद कमला सिन्हा ने मजदूर आंदोलन को जिंदा रखा ।कमला सिन्हा2 बार राज्य सभा की सांसद बनी ।गुजराल के मंत्री मण्डल में ये विदेश राज्य मंत्री रही। वैशाली जिले से कमला सिंह का काफी लगाव रहा ।अपने संसद मद से हजीपुर में बसावन सिंह इन डोर स्टेडियम के अलावे बहुत से स्कूल और अन्य संस्थायों के भवन का निर्माण कार्य करवाया । स्वतन्त्रता आंदोलन में स्वतन्त्रता सेनानी और क्रांतिकारियों के केंद्र रहे हाजीपुर के गांधी आश्रम स्थित गांधी स्मारक पुस्तकालय के लिये एक इंडोर स्टेडियम का भी निर्माण माननीय कमला सिन्हा के सहयोग से हुया है ।
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