आपको बताते हुए खुशी हो रही है कि समाजवादी समागम द्वारा 17 जून 2026 को शाम 8:00 बजे एक आभासी वैचारिक गोष्ठी आयोजित की जा रही है, जिसका विषय “भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंध तथा संप्रभुता के प्रश्न” रखा गया है।
इस गोष्ठी में विद्वान वक्ताओं के रूप में प्रख्यात पत्रकार श्री आनंद सहाय एवं श्री प्रकाश रे को आमंत्रित किया गया है। इसके साथ ही प्रोफेसर आनंद कुमार जी ने इसकी अध्यक्षता स्वीकार की है।
भारतीय समाजवादी आंदोलन के नायकों ने भारत की स्वतंत्रता के साथ-साथ संप्रभुता के प्रश्न को भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना है। किंतु आज के हालात में भारत की अंतरराष्ट्रीय राजनीति में संप्रभुता के प्रश्न को लगातार चुनौतियाँ मिल रही हैं। इसमें वर्तमान सरकार की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इस वैचारिक गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य इन पहलुओं को विस्तार से जनमानस के समक्ष रखना तथा इनके समाधान के लिए जनचेतना और जनआंदोलन की दिशा में सार्थक पहल को गति देना है।
हमें आशा है कि पिछले महीने आयोजित वैचारिक गोष्ठी की तरह यह कार्यक्रम भी सफल होगा। आप सभी साथियों से विनम्र निवेदन है कि इस गोष्ठी में भाग लें तथा चर्चा के दौरान अपनी जिज्ञासाएँ, प्रश्न और विचार अवश्य रखें।
संप्रभुता का मूल्य उस सत्य का बोध कराता है, जिसके आधार पर स्वतंत्रता की आधारशिला रखी जाती है। स्वतंत्रता व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की मुक्ति का वह आह्वान है, जिसकी अनिवार्यता जीवन के अन्य मूल्यों से भी अधिक महत्वपूर्ण होती है।
जिस संप्रभु राष्ट्र की प्राप्ति के लिए हमारे स्वतंत्रता संग्रामियों ने अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया, आज उसी मूल्य पर मंडराता खतरा हम सबको बेचैन कर रहा है। एक स्वतंत्र राष्ट्र की आकांक्षा (आर्थिक स्वतंत्रता, राजनीतिक स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्रता) ही हमारी देशभक्ति का मूल प्रेरणा-स्रोत है।
आज भारत की संप्रभुता पर अमेरिकी साम्राज्यवाद से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजारवाद तक के प्रभाव स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं।
समाजवादी समागम की इस विचार-गोष्ठी में आप सहभागी बनें और इस चिंता को चिंतन के स्तर पर गंभीरता से लेते हुए राष्ट्र-निर्माण की चुनौतियों से स्वयं को अवगत कराएँ।
आप सभी का हार्दिक स्वागत है।
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