संस्थानों की दीवारों में छिपी ईर्ष्या – परिचय दास
संस्थानों की दीवारें केवल ईंट और पत्थर से नहीं बनी होतीं; वे महत्त्वाकांक्षाओं, आशंकाओं और अनकहे प्रतिस्पर्धात्मक भावों से भी निर्मित होती हैं। जहाँ...
डॉ. रामचंद्र प्रधान का अनंत में महाप्रस्थान – प्रोफेसर राजकुमार जैन
तकरीबन साठ वर्षों तक प्रधान जी से मेरे आत्मीय संबंध बने रहे। समाजवादी विचारधारा में गहरी आस्था रखने वाले डॉ. प्रधान ताउम्र समाजवादी तवारीख...
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस : जेंडर और नस्ल के सवाल
— डॉ. शुभनीत कौशिक —
एआई आधारित सॉफ्टवेयर और एल्गोरिद्म में अंतर्निहित जेंडर और नस्ल सम्बन्धी पूर्वाग्रह की विस्तृत पड़ताल करते हुए टिमनिट गेब्रू और...
भारत की लोकसंस्कृति में शिव — राजेंद्र रंजन चतुर्वेदी
भारत की लोकसंस्कृति शिवमय है। पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक प्रत्येक जनपद में शिव की कीर्ति है। प्रत्येक जनजाति के गीतों...
कला-साहित्य के बहुवचन : शिव
— परिचय दास —
शिव के रहस्य में वसंत है, मुस्कान में कलाएं । भंगिमा में लीला है तो संपूर्ण जीवन प्रसादमय। हम भारत के...
शिव : एक सुगंध
— परिचय दास —
शिव, वह नाम जिसे लेते ही एक अद्भुत शीतलता और ऊर्जस्विता का अनुभव होता है। उनकी उपस्थिति से ही एक अलौकिक सुगंध...
साथी नानक चंद नहीं रहे! – राजकुमार जैन
50 सालों से भी अधिक समय के साथी नानक को आज यमुना किनारे बने हुए निगमबोध घाट पर बड़ी तादाद में...
नेहरू और निराला : रामचंद्र गुहा
कई सालों पहले, समाजशास्त्री त्रिलोकी नारायण पाण्डेय ने मुझसे एक घटना का ज़िक्र किया था, जो जवाहरलाल नेहरू और हिंदी के प्रसिद्ध कवि सूर्यकांत...
वेलेंटाइन डे: भारतीय संदर्भ में एक समाजशास्त्रीय विश्लेषण
— अम्बेदकर कुमार साहु —
प्रस्तुत आलेख में ‘वेलेंटाइन डे’ का समाजशास्त्रीय नजरिए से विश्लेषण किया गया है। लेख यह तर्क देता है कि वेलेंटाइन...
श्रद्धांजलि : समाजशास्त्री आंद्रे बेते की याद में
— डॉ. शुभनीत कौशिक —
भारत में सामाजिक विषमता और जातिगत संरचना का गहन अध्ययन करने वाले समाजशास्त्री आंद्रे बेते का आज 91 वर्ष की...
















