Tag: अरुण कुमार त्रिपाठी
भय और धमकियों से भरा लोकतंत्र – अरुण कुमार त्रिपाठी
पश्चिम बंगाल चुनाव का परिणाम चाहे जो हो लेकिन चुनाव की प्रक्रिया ने एक बात तो साबित कर दी है कि भारतीय लोकतंत्र भय,...
अमल खलील की पत्रकारिता से हम क्या सीखें! – अरुण कुमार...
हिंदी पत्रकारिता जब अपने उद्भव के दो सौ वर्ष पूरा करके विकास की ऐसी अवस्था में पहुंच गई है जब उसके चीखने और उछलने...
तोड़ने नहीं जोड़ने के लिए जाने जाएंगे चंद्रशेखर – अरुण कुमार...
चंद्रशेखर(पूर्व प्रधानमंत्री) जब सन 1964 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी छोड़कर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो रहे थे तो इंदिरा गांधी ने उनसे पूछा कि...
गांधी और आइंस्टीन की नजर में इजराइल – अरुण कुमार त्रिपाठी
पिछले महीने ब्रिटेन की मशहूर पत्रिका ‘द इकानमिस्ट’ की संपादक जैनी मिल्टन बेडोज़ के एक इंटरव्यू पर काफी विवाद हुआ। वे अमेरिकी पोडकास्टर टकर...
हथियार के विरुद्ध विश्वास का उद्योग लगाएं – अरुण कुमार त्रिपाठी
इजराइल-अमेरिका और ईरान युद्ध ने विश्व व्यवस्था के लिए जो खतरा पैदा किया है उस पर चिंताएं पैदा हो रही हैं लेकिन उनकी गंभीरता...
कहां गया भारत का वह अहिंसक स्वाभिमान? – अरुण कुमार त्रिपाठी
पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध में भारत की भूमिका ने यह दर्शा दिया है कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान बहुत कमजोर हो चुका है। ऐसा...
अब घृणा और युद्ध पर टिका होगा नया विश्व – अरुण...
अमेरिका और इजराइल ने रमजान के पवित्र महीने में ईरान पर हमला करके सुप्रीम नेता अयातुल्ला अली खामेनेई, राष्ट्रपति मोहम्मद पेजस्कियां, ईरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी...
एआई की बुद्धिमत्ता और हमारी मूर्खताएं – अरुण कुमार त्रिपाठी
भगवती चरण वर्मा की कहानी है ‘वसीयत’। उसमें पंडित चूड़ामणि मिश्र के परिवार के लोग जीते जी उनकी उपेक्षा करते हैं लेकिन उनकी मृत्यु...
एपस्टीन फाइल्स यानी पूंजीवाद का घिनौना चेहरा – अरुण कुमार त्रिपाठी
जिन्हें पूंजीवाद से प्रेम है और जो मानवता का भविष्य इसी व्यवस्था में देखते हैं उन्हें एपेस्टीन फाइल्स की रोशनी में अपनी मान्यताओं पर...
क्या निहत्थे पैगंबर से डर गए थे कट्टरपंथी? – अरुण कुमार...
चिंतक और लेखक सच्चिदानंद सिन्हा अपनी पुस्तक ‘द अनआर्मड प्राफेट’ ( निहत्था पैगंबर) के आखिरी अध्याय में एक महत्त्वपूर्ण सवाल उठाते हैः—क्या गांधी कामयाब...




















