Tag: अरुण कुमार त्रिपाठी
भगवान के भरोसे है हमारी नागरिकता – अरुण कुमार त्रिपाठी
भारतीय नागरिकता पर विदेश मंत्रालय के बयान के बाद देश में एक नए किस्म का भ्रम पैदा हो गया है। अब पासपोर्ट धारी लोग...
हिंदू नैतिकता, संघ और भारतीय समाज – अरुण कुमार त्रिपाठी
पिछले दिनों स्वयं सेवी संगठनों के कुछ मित्रों के आमंत्रण पर जयपुर में था। वह गोष्ठी सामाजिक नागरिक संस्थाओं के आत्मावलोकन की एक कोशिश...
बहुत अंतर है नेहरू-मोदी और उनके युग में – अरुण कुमार...
हरिवंश राय बच्चन की रचना मधुशाला की कुछ पंक्तियां पंडित जवाहर लाल नेहरू और नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री कार्यकाल की तुलना पर एकदम सटीक...
आत्मरति, अवसाद और प्रहसन में घिरा समाज – अरुण कुमार त्रिपाठी
मशहूर समाजशास्त्री आशीष नंदी ने कुछ साल पहले एक पुस्तक लिखी थी जिसका शीर्षक था—रिजीम्स आफ नारसिसिज्म, रिजीम्स आफ डेस्पेयर। यानी आत्मरति और अवसाद...
काकरोच का समर्थन विपक्ष का विरोध नहीं – अरुण कुमार त्रिपाठी
कुछ लोग विपक्ष को व्यक्ति वाचक संज्ञा मानते हैं। कुछ लोग दलवाचक संज्ञा मानते हैं तो कुछ लोग गठबंधन वाचक। वे लोग महीने भर...
भाषा में संयम बनाम आचरण की भाषा – अरुण कुमार त्रिपाठी
अच्छा हुआ कि भारत के मुख्य न्यायाधीश ने तुच्छ याचिकाएं डालने और सोशल मीडिया पर न्यायपालिका की आलोचना करने वालों को अंग्रेजी में ‘काकरोच...
कौन सा विपक्ष, किसका विपक्ष और कैसा विपक्ष?
— अरुण कुमार त्रिपाठी —
स्वतंत्र भारत के इतिहास में कई बार विपक्ष की स्थिति कमजोर रही है। वह निष्प्रभावी रहा है और वैचारिक और...
भय और धमकियों से भरा लोकतंत्र – अरुण कुमार त्रिपाठी
पश्चिम बंगाल चुनाव का परिणाम चाहे जो हो लेकिन चुनाव की प्रक्रिया ने एक बात तो साबित कर दी है कि भारतीय लोकतंत्र भय,...
अमल खलील की पत्रकारिता से हम क्या सीखें! – अरुण कुमार...
हिंदी पत्रकारिता जब अपने उद्भव के दो सौ वर्ष पूरा करके विकास की ऐसी अवस्था में पहुंच गई है जब उसके चीखने और उछलने...
तोड़ने नहीं जोड़ने के लिए जाने जाएंगे चंद्रशेखर – अरुण कुमार...
चंद्रशेखर(पूर्व प्रधानमंत्री) जब सन 1964 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी छोड़कर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो रहे थे तो इंदिरा गांधी ने उनसे पूछा कि...




















