Tag: अरुण कुमार त्रिपाठी
स्वैच्छिक दासता, चुनाव और आंदोलन – अरुण कुमार त्रिपाठी
विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर पूरे देश में चल रही वोट चोरी (नहीं डकैती) के समक्ष देश के पास तीन विकल्प हैं। पहला...
सौ साल की आत्मकथा/ सत्य के प्रयोग का शताब्दी वर्ष
— अरुण कुमार त्रिपाठी —
यह गांधी की आत्मकथा यानी ‘सत्य के मेरे प्रयोग’ का शताब्दी वर्ष है। हालांकि गांधी की आत्मकथा का शताब्दी वर्ष...
हिंदुत्व और सामाजिक न्याय की सीमाएं
— अरुण कुमार त्रिपाठी —
उत्तर भारत की राजनीति ने वहां के समाज को त्रिशंकु की तरह अधर में लटका दिया है। यह राजनीति अपने...
आखिर नक्सली दिमागी क्यों होते हैं – अरुण कुमार त्रिपाठी
नक्सली दिमागदार होते हैं यह धारणा पुलिसिया सोच से उत्पन्न हुई है। इसलिए प्रधानमंत्री जब इस साल पंद्रह अगस्त को लाल किले के प्राचीर...
संवाद और संग्राम के बीच हमारी सभ्यता – अरुण कुमार त्रिपाठी
वैसे तो पूरी मानव सभ्यता ही संवाद और संग्राम के बीच उलझी हुई है लेकिन भारत विशेष तौर पर इसका शिकार है। जंतर मंतर...
वांगचुक को कोसिए, सत्याग्रह को नहीं – अरुण कुमार त्रिपाठी
कृतघ्नता दिल्ली के स्वभाव में है। चूंकि दिल्ली भारत की राजधानी है इसलिए वह स्वभाव एक चरित्र बनकर पूरे देश में व्याप्त हो गया...
गालियां मोहब्बत की, गालियां नफरत की और गालियां गुस्से की
— अरुण कुमार त्रिपाठी —
जंतर मंतर प्रदर्शन और अनशन के दौरान जेन-जी के बयानों और पोस्टरों में सरकार और उसके पदाधिकारियों के लिए गालियां...
डूबते लोकतंत्र को जेन जी का किनारा – अरुण कुमार त्रिपाठी
अचानक पुरानी हिंदी फिल्मों के गाने याद आने लगे। 1954 में ‘जागृति’ फिल्म आई थी। उसका एक गाना लोगों की जुबान पर लंबे समय...
क्या इससे रुक जाएगा हिंदू राष्ट्र का रथ? – अरुण कुमार...
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और शिक्षा में सुधार की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर से पूरे देश में फैल चुका...
सभ्य समाज को ही मिलती है अच्छी पुलिस – अरुण कुमार...
साहित्य अकादेमी पुरस्कार विजेता, जाने माने शायर और इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति रहे आनंद नारायण मुल्ला ने 1961 में भारतीय पुलिस व्यवस्था को...




















