Tag: परिचय दास
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना: समय की नब्ज पर सर्वेश्वर की उंगली
— परिचय दास —
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की पत्रकारिता को केवल साहित्यकार की पत्रकारिता कह देना उसके वास्तविक महत्त्व को छोटा कर देना होगा। उनकी...
सत्यप्रकाश मिश्र: आलोचना में असहमति का विवेक
— परिचय दास —
।। एक।।
हिंदी आलोचना के इतिहास में कुछ आलोचक ऐसे हैं जिनकी अनुपस्थिति से अधिक उनकी उपस्थिति का ढंग ध्यान खींचता है।...
कृष्ण : जीवन के सबसे सुंदर अर्थ की तरह
— परिचय दास —
कृष्ण को याद करते ही सबसे पहले कोई मंदिर नहीं खुलता, कोई शास्त्र नहीं खुलता, कोई दार्शनिक सूत्र सामने नहीं आता।...
राही मासूम रज़ा : इतिहास के शोर में मनुष्य की बची...
— परिचय दास —
।। एक।।
आपातकाल के विरोधी रहे राही मासूम रज़ा को पढ़ते हुए सबसे पहले जो चीज़ सामने आती है, वह उनकी कथा...
नंदकिशोर आचार्य : साहित्य की अंतर्ध्वनि और आलोचना का मानवीय विवेक
— परिचय दास —
।। चार।।
नंदकिशोर आचार्य की आलोचना का विशिष्ट पक्ष उनकी अज्ञेय-दृष्टि में दिखाई देता है। अज्ञेय पर लिखते हुए आचार्य केवल एक...
नंदकिशोर आचार्य : साहित्य की अंतर्ध्वनि और आलोचना का मानवीय विवेक
— परिचय दास —
।। एक।।
नंदकिशोर आचार्य की आलोचना को पढ़ना केवल किसी आलोचक के साहित्यिक निष्कर्षों से गुजरना नहीं है बल्कि उस मनुष्य के...
विजय देव नारायण साही का प्रस्थान-बिंदु : सूफी, सत्ता और जायसी...
— परिचय दास —
विजयदेवनारायण साही की आलोचना~पुस्तक-- ‘जायसी’ को केवल मलिक मुहम्मद जायसी पर लिखी गई आलोचनात्मक पुस्तक मानना उसके वास्तविक महत्व को कम...
राखी की डोरी और मनुष्य की स्वतंत्रता
— परिचय दास —
रक्षाबंधन आते ही घर के भीतर एक बहुत पुरानी ध्वनि लौट आती है। कहीं थाली में रोली सजती है, कहीं अक्षत की...
परंपरा से परे नहीं, समय के भीतर : तुलसी की कविता...
— परिचय दास —
“नाना पुराण निगमागम सम्मतं यद् रामायणे निगदितं क्वचिदन्यतोऽपि।
स्वान्तःसुखाय तुलसी रघुनाथगाथा भाषानिबन्धमतिमञ्जुलमातनोति॥”
और इसी विनम्र आत्मस्वीकार को तुलसी एक दूसरी जगह और अधिक...
तुलसी : एक जीवित पाठ के भीतर प्रवेश
— परिचय दास —
।। एक ।।
समकालीन तुलसी-पाठ में पाठ की बहुस्तरीयता, सत्ता-संरचनाएँ, भाषा, वंचित आवाज़ें, जेंडर, जाति, प्रकृति, कथन-तकनीक, अंतर्पाठीयता, पाठक-समुदाय और बदलते अर्थ-संदर्भ...




















