Tag: परिचय दास
दिनकर की सांस्कृतिकी : परंपरा से भविष्य तक
— परिचय दास —
दिनकर को केवल राष्ट्रकवि कह देना उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को एक सुविधाजनक परिचय में बाँध देना है। उनके भीतर जो कवि...
वासुदेवशरण अग्रवाल : साहित्य में संस्कृति की खोज
— परिचय दास —
।। एक ।।
हिंदी आलोचना का इतिहास केवल उन नामों से नहीं बनता जिन्हें इतिहास ने अपने मुख्य पृष्ठ पर जगह दी...
विनोबा भावे के गीता प्रवचन के बहाने
— परिचय दास —
11 सितंबर को विनोबा भावे की जयंती थी । इस अवसर पर विनोबा को केवल फूलों से याद करना थोड़ा कम याद...
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना: समय की नब्ज पर सर्वेश्वर की उंगली
— परिचय दास —
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की पत्रकारिता को केवल साहित्यकार की पत्रकारिता कह देना उसके वास्तविक महत्त्व को छोटा कर देना होगा। उनकी...
सत्यप्रकाश मिश्र: आलोचना में असहमति का विवेक
— परिचय दास —
।। एक।।
हिंदी आलोचना के इतिहास में कुछ आलोचक ऐसे हैं जिनकी अनुपस्थिति से अधिक उनकी उपस्थिति का ढंग ध्यान खींचता है।...
कृष्ण : जीवन के सबसे सुंदर अर्थ की तरह
— परिचय दास —
कृष्ण को याद करते ही सबसे पहले कोई मंदिर नहीं खुलता, कोई शास्त्र नहीं खुलता, कोई दार्शनिक सूत्र सामने नहीं आता।...
राही मासूम रज़ा : इतिहास के शोर में मनुष्य की बची...
— परिचय दास —
।। एक।।
आपातकाल के विरोधी रहे राही मासूम रज़ा को पढ़ते हुए सबसे पहले जो चीज़ सामने आती है, वह उनकी कथा...
नंदकिशोर आचार्य : साहित्य की अंतर्ध्वनि और आलोचना का मानवीय विवेक
— परिचय दास —
।। चार।।
नंदकिशोर आचार्य की आलोचना का विशिष्ट पक्ष उनकी अज्ञेय-दृष्टि में दिखाई देता है। अज्ञेय पर लिखते हुए आचार्य केवल एक...
नंदकिशोर आचार्य : साहित्य की अंतर्ध्वनि और आलोचना का मानवीय विवेक
— परिचय दास —
।। एक।।
नंदकिशोर आचार्य की आलोचना को पढ़ना केवल किसी आलोचक के साहित्यिक निष्कर्षों से गुजरना नहीं है बल्कि उस मनुष्य के...
विजय देव नारायण साही का प्रस्थान-बिंदु : सूफी, सत्ता और जायसी...
— परिचय दास —
विजयदेवनारायण साही की आलोचना~पुस्तक-- ‘जायसी’ को केवल मलिक मुहम्मद जायसी पर लिखी गई आलोचनात्मक पुस्तक मानना उसके वास्तविक महत्व को कम...




















