Tag: परिचय दास
राही मासूम रज़ा : इतिहास के शोर में मनुष्य की बची...
— परिचय दास —
।। एक।।
आपातकाल के विरोधी रहे राही मासूम रज़ा को पढ़ते हुए सबसे पहले जो चीज़ सामने आती है, वह उनकी कथा...
नंदकिशोर आचार्य : साहित्य की अंतर्ध्वनि और आलोचना का मानवीय विवेक
— परिचय दास —
।। चार।।
नंदकिशोर आचार्य की आलोचना का विशिष्ट पक्ष उनकी अज्ञेय-दृष्टि में दिखाई देता है। अज्ञेय पर लिखते हुए आचार्य केवल एक...
नंदकिशोर आचार्य : साहित्य की अंतर्ध्वनि और आलोचना का मानवीय विवेक
— परिचय दास —
।। एक।।
नंदकिशोर आचार्य की आलोचना को पढ़ना केवल किसी आलोचक के साहित्यिक निष्कर्षों से गुजरना नहीं है बल्कि उस मनुष्य के...
विजय देव नारायण साही का प्रस्थान-बिंदु : सूफी, सत्ता और जायसी...
— परिचय दास —
विजयदेवनारायण साही की आलोचना~पुस्तक-- ‘जायसी’ को केवल मलिक मुहम्मद जायसी पर लिखी गई आलोचनात्मक पुस्तक मानना उसके वास्तविक महत्व को कम...
राखी की डोरी और मनुष्य की स्वतंत्रता
— परिचय दास —
रक्षाबंधन आते ही घर के भीतर एक बहुत पुरानी ध्वनि लौट आती है। कहीं थाली में रोली सजती है, कहीं अक्षत की...
परंपरा से परे नहीं, समय के भीतर : तुलसी की कविता...
— परिचय दास —
“नाना पुराण निगमागम सम्मतं यद् रामायणे निगदितं क्वचिदन्यतोऽपि।
स्वान्तःसुखाय तुलसी रघुनाथगाथा भाषानिबन्धमतिमञ्जुलमातनोति॥”
और इसी विनम्र आत्मस्वीकार को तुलसी एक दूसरी जगह और अधिक...
तुलसी : एक जीवित पाठ के भीतर प्रवेश
— परिचय दास —
।। एक ।।
समकालीन तुलसी-पाठ में पाठ की बहुस्तरीयता, सत्ता-संरचनाएँ, भाषा, वंचित आवाज़ें, जेंडर, जाति, प्रकृति, कथन-तकनीक, अंतर्पाठीयता, पाठक-समुदाय और बदलते अर्थ-संदर्भ...
गिरधर राठी: कविता की महीन आवाज़
— परिचय दास —
गिरधर राठी का अस्सीवाँ वर्ष किसी कैलेंडर पर चढ़ी हुई एक संख्या भर नहीं है। यह उस कवि की यात्रा का...
प्रेमचंद : राजनीति से संवाद करता साहित्य, राजनीति के अधीन नहीं
— परिचय दास —
प्रेमचंद का साहित्य जिस समय विकसित हुआ, वह भारतीय इतिहास का असाधारण संक्रमणकाल था। औपनिवेशिक सत्ता, राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन, सामंती अवशेष, जमींदारी...
तर्क, विज्ञान और मिथक – परिचय दास
।। एक।।
तर्क, विज्ञान और मिथक तीन ऐसे ज्ञान-क्षेत्र हैं, जिन्हें अक्सर एक-दूसरे का विरोधी मान लिया जाता है। तर्क को विवेक का पर्याय, विज्ञान...




















