राजनीति

इक्कीसवीं सदी की दहलीज़ पर भगत सिंह

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— कनक तिवारी — भगत सिंह सम्भावनाओं के जननायक बनकर इतिहास में अपनी धारदार उपस्थिति दर्ज कराते हैं। उन्हें देश के लिए जीने की ज़्यादा उम्र नहीं मिली। ईश्वर में भगतसिंह को आस्था नहीं थी।...

इस दुनिया में अजनबी की तरह आया और इसे छोडते समय भी मैं अजनबी...

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इस दुनिया में अजनबी की तरह आया और इसे छोडते समय भी मैं अजनबी ही हूं", लिखा था औरंगजेब ने अपने एक खत में अपनी जिन्दगी के आखिरी वक्त में। वह जानता था कि...

भारत के हिन्दुत्ववादी जनगण का आदर्श अमेरिका

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— पंकज मोहन — भारत के हिन्दुत्ववादी जनगण का आदर्श अमेरिका है। जब अमेरिका ने अपने देश में अवैध रूप से रह रहे भारतीयों को बेड़ियों में जकडकर भारत भेजा, वे चिल्लाने लगे, भारत मे...

उप्र में मस्जिदों को तिरपाल से ढँकने का फ़ैसला किसका था?

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— रमाशंकर सिंह — उप्र में मस्जिदों को तिरपाल से ढँकने का फ़ैसला किसका था? क्या यूपी सरकार ने कैसा भी अलिखित दवाब बनाया? अगर ऐसा होता तो सभी मस्जिदें ढँकी नहीं गयीं। क्या मौलवियों...
mahakumbh

वैदिक काल और कुंभ !

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— महेश विक्रम — वैदिक काल से कुंभ का कोई संबंध बनता ही नहीं, प्रयाग के संगम का परिचय ही उसके बाद हुआ, तीर्थों और संगमों पर स्नान की परंपरा ही गुप्त काल से विकसित...

सावरकर की असली हकीकत पर

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— पंकज श्रीवास्तव — विनायक दामोदर सावरकर की ‘वीरता’ पर सवाल उठाने वाले राहुल गाँधी न सिर्फ़ बीजेपी के निशाने पर हैं, बल्कि इस मसले पर उन्हें तमाम क़ानूनी दिक़्क़तों का सामना भी करना पड़...

कुंभ में मृत्यु स्नान और संघ

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— जागृति राही — अखाड़ों से लेकर बाबाओं के आश्रम बड़ी सी जमीन पर काबिज हैं वीआईपी लोगों के लिए सारी व्यवस्था बना रखी थी, पुल तक श्रद्धालुओं के लिए बंद थे , 144 साल...

जागो नहीं तो असमानता और कुचलेगी

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— अरुण कुमार त्रिपाठी — प्रयागराज में मौनी अमावस्या की रात को जो कुछ हुआ वह दुःखद भी है और दर्दनाक भी। लेकिन वह भेदभाव, गैरबराबरी, असमानता और अहंकार के जिस सोच के तहत हुआ...

कर्पूरी ठाकुर : सामाजिक न्याय और समाजवाद का संगम

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— प्रो. अजीत झा — कुछ नेताओं का राजनीतिक पुनर्जन्म उनकी मृत्यु के बाद भी होता है। बाबा कु साहब अंबेडकर अपने जीवन काल में एक महत्वपूर्ण नेता थे। पर आज उनका राजनीतिक कद और...

दिल्ली विधानसभा दंगल जारी है!

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— प्रोफेसर राजकुमार जैन — दिल्ली विधानसभा के चुनाव का शोरगुल उफ़ान पर है। विचारधारा, सिद्धांत, नीति की जगह कपड़ा बदलने की तरह सियासत का हल्ला चारों तरफ सुनाई दे रहा है। पता नहीं कौन...