सोनम को लिखे एक पत्र के बहाने जनांदोलनों की नैतिक राजनीति पर विमर्श
— कुमार कृष्णन —
भारतीय लोकतंत्र का इतिहास केवल चुनावों, संसद और सरकारों का इतिहास नहीं है। यह उन जनांदोलनों का भी इतिहास है जिन्होंने समय-समय पर सत्ता को आईना दिखाया, समाज की चेतना को...
सतलुज/पंजाब 95: इतिहास और कल्पना
— परमजीत एस. जज —
कॉन्ट्रोवर्शियल फिल्म "पंजाब 95" सेंसर बोर्ड की आपत्ति के कारण अभी तक रिलीज़ नहीं हो सकी है। लेकिन इसका टाइटल बदल कर "सतलुज" नाम से ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर दिखाया...
जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलन पर मेरा नज़रिया! – राजकुमार जैन
किसी भी इंसान की जान जब खतरे में हो तो इंसानियत का तकाजा है की सबसे पहले उसकी हिफाजत की जाए।
सवाल है की क्या कॉकरोच जनता पार्टी के नाम से बनी इस पार्टी...
सोनम वांगचुक का जंतर मंतर पर आमरण अनशन या युवाओं तथा विद्यार्थियों का विरोध...
— शंभू नाथ —
सोनम वांगचुक का जंतर मंतर पर आमरण अनशन या युवाओं तथा विद्यार्थियों का विरोध एक बड़ा साहस है और हम इसे दुर्लभ भी कह सकते हैं, क्योंकि पहली बार आंदोलनकारी स्थानीय...
भारत में समकालीन युवा आंदोलन: परिवर्तन की राजनीति और राजनीति का परिवर्तन
— Randhir Gautam —
यह संतोष की बात है कि लंबे समय के बाद जन आंदोलनों में युवाओं की भूमिका और महत्त्व को फिर से केंद्रीय स्थान मिला है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 1942 के...
बेईमानी में भी ईमानदारी का आभास दिलाने का कुचक्र! – अन्ना दुराई
लगता है आजकल बड़े से बड़े घोटाले भी मात्र हंसी मजाक का विषय बनकर रह गए हैं। जहां देखो, लीपापोती के अलावा कुछ नहीं। कारस्तानियों के पक्ष में तर्क ऐसे ऐसे कि आँख शर्म...
सोनम वांगचुक: सत्य के लिए संघर्ष – डॉ योगेन्द्र
क्या भारत में एक अनशनकारी शहीद हो जायेगा? क्या सरकार अंधी- बहरी हो गई है? क्या शांतिपूर्ण आंदोलन का कोई मतलब नहीं रह जाएगा? बारह- तेरह दिन बीत गये । लद्दाख के सोनम वांगचुक...
शिक्षक और वैज्ञानिक सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल!
जाने-माने पर्यावरणविद, शिक्षक और वैज्ञानिक सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का आज नवां दिन हैँ। दिल्ली की इस झुलसाने वाली भीषण गर्मी में, लद्दाख के बर्फीले पहाड़ों को छोड़कर आया यह शख्स तड़प रहा...
क्या नेहरू ने सुभाष का साथ छोड़ा था?
— राज गोपाल सिंह बर्मा —
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद और विशेष रूप से बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध से भारतीय सार्वजनिक विमर्श में एक प्रश्न बार-बार उठाया जाता रहा है कि क्या जवाहरलाल नेहरू ने...
धार्मिक आस्थाओं का राजनीतिक अस्थि संचय? – श्रवण गर्ग
जनता इतने आत्मविश्वास के साथ क्यों दावा कर रही है कि रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में हुए चंदे-चढ़ावे के घोटाले में कुछ भी नहीं होगा या कुछ निकलेगा ? असली दोषियों के न कभी नाम...
















