राजनीति

क्या ‌‌ऐसे भाजपा को हराया जा सकता है? – प्रोफेसर राजकुमार जैन

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पश्चिम बंगाल,असम, पांडूचेरी,में भाजपा ने जीत के लिए क्या-क्या हथकंडे अपनाए हैं, हर कोई इससे वाकिफ है परंतु सवाल है कि इसका मुकाबला कैसे किया जाए। जितने भी विरोधी दल हैं उनकी संगठनात्मक संरचना...
Mamata Banerji

भय और धमकियों से भरा लोकतंत्र – अरुण कुमार त्रिपाठी

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पश्चिम बंगाल चुनाव का परिणाम चाहे जो हो लेकिन चुनाव की प्रक्रिया ने एक बात तो साबित कर दी है कि भारतीय लोकतंत्र भय, अविश्वास, प्रतिशोध और पक्षपाती राज्य तंत्र के शिकंजे में फंस...
Modi

कब तक डर-डर कर जीना चाहता है देश? – श्रवण गर्ग

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हमने इस बात पर शायद ही कभी गौर किया हो कि आपसी बातचीत या ‘गोदी चैनलों’ की बहसों को देखने-सुनने के दौरान हम दिन के कितने घंटे सिर्फ़ एक ही व्यक्ति यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र...

राजनीति, पहचान और भाषा: गिरते मानकों की कथा – परिचय दास

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समय की सबसे विचित्र विडंबनाओं में एक यह है कि संवाद के साधन जितने विस्तृत हुए हैं, संवाद की गुणवत्ता उतनी ही संकुचित होती गई है। शब्दों की संख्या बढ़ी है, अर्थों की गरिमा...
Arvind Kejariwal

सत्ता के समीकरण और वैचारिक दरारें: आम आदमी पार्टी के सामने नई चुनौती

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— परिचय दास — भारतीय राजनीति में दल-बदल अब उतना असामान्य नहीं रहा, जितना उसे कभी संविधान निर्माताओं ने समझा था। फिर भी हर बार जब किसी दल के कई सांसद या विधायक एक साथ...
Migrant Workers

जनगणना में जरूरी प्रवासी मजदूर – अरविन्द मोहन

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करीब डेढ़ दशक बाद होने जा रही 'जनगणना 2027' में जातियों की बहुप्रचारित मर्दुमशुमारी के अलावा उन असंख्य प्रवासी-मजदूरों का भी महत्व होना चाहिए जो हमारे 'जीडीपी' को अनजाने में आसमान तक पहुंचाने में...

बिहार के युवाओं का पलायन: हर सरकार का वादा, हर पीढ़ी की मजबूरी

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— परिचय दास — “पलायन” शब्द बिहार के संदर्भ में कोई नई घटना नहीं है; यह एक लम्बी, थकी हुई परंपरा है जो हर पीढ़ी के साथ अपने अर्थ और विस्तार को बदलते हुए भी...

बिहार की राजनीति और सत्ता का मनोविज्ञान – परिचय दास

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बिहार की राजनीति को समझना केवल घटनाओं, दलों और नेताओं की सूची बनाना नहीं है; यह एक ऐसे जटिल मनोविज्ञान को पढ़ना है जो दशकों से सत्ता, समाज और स्मृतियों के बीच बनता-बिगड़ता रहा...
Samrat Choudhary

सामाजिक इंजीनियरिंग की अग्निपरीक्षा: बीजेपी के सामने बिहार का सवाल

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— परिचय दास — ।।एक ।। सत्ता का गणित कभी सीधा नहीं होता। लोग हर बार उम्मीद करते हैं कि राजनीति कोई स्कूल की जोड़-घटाव है। “बीजेपी मुख्यमंत्री बना रही है तो वोट बैंक भी साथ...
bihar cabinet

खास दर्जा तो बिहार को चाहिए – मोहन गुरुस्वामी

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अरस्तू की यह उक्ति मशहूर है कि दो समानों के बीच असमान व्यवहार की तरह ही दो असमानों के साथ समान व्यवहार अन्यायपूर्ण है। माना जाता है कि असमानता अन्यायपूर्ण तो है, पर इससे...